*आजादी की लड़ाई में अहम योगदान दिए, ब्रह्मदेव चौधरी*
*अपने समाज के गद्दारों को भी सबक सिखाया करते थे*
जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार ब्यूरो चीफ प्रभु जी खगड़िया जिले के कई क्रांतिकारियों ने देश की आजादी में अपनी अहम भूमिका निभायी। वहीं क्रांतिकारियों में खगड़िया जिले के संसारपुर गांव निवासी ब्रह्मदेव चौधरी का नाम लोग बड़े ही गर्व के साथ लेते हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली पेंशन लेने से इंकार कर दिया। इस संबंध में उन्होंने कहा कि उसने अपनी मातृभूमि के लिए अपना फर्ज निभाया है। अपने फर्ज के बदले कुछ भी पाने की उनकी कोई चाहत नहीं है। स्वतंत्रता सेनानी ब्रहमदेव चौधरी का जन्म वर्ष’ 1900 में जन्म हुआ। 22 मई 2002 में उनकी 102 वर्ष की आयु में देहान्त हो गया। उनकी मौत इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया। दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी ब्रह्मदेव चौधरी के पुत्र दीपक कुमार बताते हैं, कि अंग्रेजों कर संपत्तियों को लूटकर आन्दोलन कारियों के लिए धन संग्रह करते थे। 14 अगस्त 1942 और उसके बाद मानसी स्टेशन पर मालगाड़ी आसपास के कारखानों के अलावा पानी जहाज पर भी लूटपाट कर स्वतंत्रता सेनानियों की मदद में जुटे रहे। वे सिर्फ अंग्रेजों से ही लोहा नहीं लेते थे। बल्कि अपने समाज के गद्दारों को भी सबक सिखाया करते थे।ब्रहादेव चौधरी, अंग्रेजों ने उनके घर से 47 बंदूकें जब्त की। वही सरेंडर के लिए दबाव बनाने उसके पिता लाखो चौधरी व मां को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बताया जाता है कि अपने माता-पिता की गिरफ्तारी की सूचना पर उन्होंने अंग्रेज पुलिस के सामने हाजिर होकर उन्हें छोड़ देंने की शर्त रखी। उनकी ब्रिटिश गतिविधियों से बौखलाए अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें 11 दिन तक हाजत में रखकर अमानवीय यातनाएं दी। जब ग्रामीणों को यह जानकारी मिली तो उन्हें जेल भेजने की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। समाज के गद्दारों को भी सबक सिखाते थे। उन्होंने कहाँ कि आजादी के आंदोलन के दौरान अंग्रेजों को मदद करने वाले को चेतावनी देकर एक आंख फोड़ दी थी। उनकी कर्मभूमि खगड़िया के अलावा बेगूसराय जिले भी रही। वहां भी अंग्रजों के खिलाफ लोगों को गोलबंद करते थे। बताया जाता है। अपने जमाने के अंग्रेजों की संपत्तियों को लूटकर आन्दोलन के लिए धन संग्रह करते थे। मातृभूमि के लिए अपना पेंशन लेने से उन्होंने कर दिया इंकार अंग्रेजों ने उनके घर से 47 बंदूकें की थी, बरामद बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया। वही उनके साथ ही धन्ना व माधव 13 अगस्त 1942 को अंग्रेजों के गोली के दमन के शिकार शहीद हो गए। इससे पहले महेंद्र चौधरी को फांसी की सजा व ब्रह्मदेव चौधरी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जेल में उन्हें अपर डिवीजन का बंदी घोषित किए गए। हर रविवार को कडी सुरक्षा में भागलपुर जेल से उन्हें घर संसारपुर लाया जाता था। बिहार आए महात्मा गांधी ने जानकारी मिलने पर उनके घर पर गए और परिजनों से हालात की जानकारी ली। बीए पास ब्रह्मदेव बाबू अपने मित्र चौथम थाना क्षेत्र के पिपरा गांव निवासी महेंद्र चौधरी व. मानसी के धन्ना-माधव के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल थे। ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें हाजिर होने का फरमान जारी किया, लेकिन वे अंग्रेजों की आंख में धूल झोंक कर आजादी की लड़ाई में डटे रहे।


