जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद सैयद आसिफ इमाम काकवी जहानाबाद यह नाम आते ही सीने में एक अजीब-सी गर्माहट उतर आती है। यह ज़िला सिर्फ़ नक़्शे की एक रेखा नहीं, बल्कि एक ऐसी सरज़मीं है जिसकी मिट्टी में मोहब्बत, इल्म, तहज़ीब और फन की सदियों पुरानी खुशबू बसी हुई है। यही वजह है कि जहानाबाद ने अपने दामन में ऐसे अज़ीम लोग पैदा किए जिनकी रोशनी उनके जाने के बाद भी इस शहर की गलियों और उसके मिज़ाज को रौशन करती रहती है। आज जब इन चारों की बरसी एक साथ मनाई जा रही है, तो यह जहानाबाद की उस फितरत का ऐलान है जो अपने बुज़ुर्गों को भूलना जानती ही नहीं। यह शहर अपने अतीत को सिर्फ़ याद नहीं करता उसे सीने से लगाकर रखता है। यहाँ किरदार दफन नहीं होते, बल्कि पीढ़ियों की रगों में बहते रहते हैं। नागरिक विकास मंच की यह पेशकश एक एहतराम है, एक शुक्रगुज़ारी है, और एक यह पैग़ाम भी कि जहानाबाद की रौशन चराग़ कभी बुझते नहीं। यह शहर अपने महबूब बुज़ुर्गों की रोशनी में आज भी ज़िंदा है और हमेशा ज़िंदा रहेगा। स्व. सुरेन्द्र शर्मा, प्रो. अकील अहमद, स्व. बामेश्वर प्रसाद सिंह, और जफरुद्दीन जया को एक साथ याद कर रहा है, तो यह सिर्फ़ एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि जहानाबाद की तहज़ीबी विरासत की सबसे ताक़तवर मिसाल है। ये चारों सिर्फ़ लोग नहीं थे, ये जहानाबाद की रूह का हिस्सा थे। इनकी मौजूदगी जहानाबाद के लिए एक बरकत थी और इनका जाना जहानाबाद की पेशानी पर एक ऐसी कमी है, जो वक्त भी पूरी नहीं कर सकता। इन चारों हस्तियों ने अपने-अपने दौर में जहानाबाद को सिर्फ़ संभाला नहीं, बल्कि सँवारा उसे एक पहचान दी उसे एक रूह दी उसे मोहब्बत और इल्म की ऐसी मशाल दी जिसकी लौ आज भी बुझी नहीं है। यह हस्तियाँ दुनिया से रुख़्सत तो हो गईं, मगर उनके क़दमों की आहट, उनकी बातों की गर्माहट, उनकी सोच की खूशबू, उनकी दुआओं की बरकत आज भी जहानाबाद की फिज़ाओं में गूँजती है। जहानाबाद की मिट्टी का यह उसूल रहा है जो यहाँ से उठता है, वह दिलों में उतरकर सदियों तक ज़िंदा रहता है।
स्वर्गीय सुरेन्द्र शर्मा साहब का नाम जहानाबाद की सामाजिक चेतना का पर्याय था। उनकी सादगी, उनकी बातों की पवित्रता और नगर परिषद के लिए उनकी सेवाएँ इस शहर की रगों में आज भी दौड़ती हैं। प्रो. अकील अहमद साहब, जहानाबाद की इल्मी दुनिया का एक उजला सितारा। उनकी शख़्सियत में गंभीरता भी थी और नरमी भी। उन्होंने शिक्षा को इबादत की तरह जिया। जहानाबाद में ज्ञान को जो हवा मिली, उसमें उनके योगदान की महक आज तक बाक़ी है। स्व. बामेश्वर प्रसाद सिंह जैसा चिंतक और समाजसेवी किसी शहर के लिए सौभाग्य से कम नहीं। उनका विचार, उनका संघर्ष और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, जहानाबाद की सामूहिक स्मृति में हमेशा अमिट रहेगी। और फिर जफरुद्दीन जया साहब जहानाबाद की शायरी, उसकी अदब, उसकी गहरी तहज़ीब का ज़िक्र इनके बिना मुकम्मल ही नहीं हो सकता। उनकी मिसरे आज भी लोगों की ज़बान पर हैं और उनके ख्याल आज भी जहानाबाद की रूह में गूँजते हैं। आज जब इन चारों की बरसी एक साथ मनाई जा रही है, तो यह जहानाबाद की उस फितरत का ऐलान है जो अपने बुज़ुर्गों को भूलना जानती ही नहीं। यह शहर अपने अतीत को सिर्फ़ याद नहीं करता उसे सीने से लगाकर रखता है। यहाँ किरदार दफन नहीं होते, बल्कि पीढ़ियों की रगों में बहते रहते हैं। नागरिक विकास मंच की यह पेशकश एक एहतराम है, एक शुक्रगुज़ारी है, और एक यह पैग़ाम भी कि जहानाबाद की रौशन चराग़ कभी बुझते नहीं। यह शहर अपने महबूब बुज़ुर्गों की रोशनी में आज भी ज़िंदा है और हमेशा ज़िंदा रहेगा।
जहानाबाद की सरज़मीं और उसके चार रौशन चराग़ एक रूहानी याद, एक मोहब्बत भरी पेशकश
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