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नीतीश कुमार के ‘फंडे’ को फॉलो कर नीतीश कुमार को मात देने की रणनीति पर प्रशांत किशोर!

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पटना. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर यानी पीके अब पूरी तरह से एक्टिव पॉलिटिक्स में उतर आए हैं. उन्होंने बिहार में सियासी बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा, ”अब बिहार को आगे बढ़ाने के लिए नई सोच और नए प्रयास की आवश्यकता है. अगर बिहार के सब लोग मिल कर नई सोच को आगे नहीं बढ़ाएंगे तो बिहार आगे नहीं बढ़ सकता है. बिहार के लोगों को बदलाव के लिए आगे आना होगा.” पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इसके लिए आगामी 2 अक्टूबर से पश्चिमी चंपारण से 3000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालने की भी घोषणा की है. पीके ने बताया कि वह अगले 3 से 4 महीने में में 17 से 18 हजार लोगों से मुलाकात कर उनके साथ जन सुराज की चर्चा करेंगे.

प्रशांत किशोर ने बताया कि वह बेतिया के गांधी आश्रम से पदयात्रा की शुरुआत करेंगे. इस दौरान वह हर व्‍यक्ति से मुलाकात करने की कोशिश करेंगे. प्रशांत किशोर ने कहा कि मेरा फोकस बिहार के लोगों से मिलना, उनकी बात को समझना और लोगों को जन सुराज से जोड़ना है. प्रशांत किशोर ने बताया कि उन्‍होंने पिछले 5 महीने में 17 हजार से ज्‍यादा लोगों से संपर्क स्‍थापित किया और अब इन लोगों से मुलाकात करेंगे.

बता दें कि इससे पहले भी प्रशांत किशोर ने जनता दल यूनाइटेड से जुड़कर नीतीश कुमार के साथ राजनीतिक पारी का आगाज किया था. वे जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए थे. लेकिन, कुछ मुद्दों को लेकर नीतीश कुमार से मतभेद हुआ और उन्हें जदयू छोड़ना पड़ा. मगर राजनीति के जानकार यही कह रहे हैं कि भले ही उन्होंने जदयू छोड़ दिया है, लेकिन अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए नीतीश कुमार की ही राह को चुना है.

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दरअसल, नीतीश कुमार अपने कार्यकाल के दौरान कई यात्राएं निकाल चुके हैं और इसके जरिये वे जनता से जुड़ते रहे हैं और लोगों के बीच सीधा संवाद करते हैं. बता दें कि नीतीश कुमार ने सबसे पहले 12 जुलाई 2005 को अपनी पहली यात्रा शुरू की थी. इसी न्याय यात्रा के बूते उन्होंने राजद को बिहार की सत्ता से उखाड़ फेंका और बीते 18 वर्षों से बिहार की सियासत के सिरमौर बने हुए हैं.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने वर्ष 2009 में सबसे अधिक तीन बार यात्रा निकाली. 9 जनवरी 2009 से विकास यात्रा, 7 जून 2009 से धन्यवाद यात्रा और 25 दिसंबर 2009 से प्रवास यात्रा की. सबसे खास बात यह कि इन यात्राओं के दौरान वे जनता के बीच सीधे होते और समस्याओं को सुन ऑनस्पॉट निर्णय भी करते. इन यात्राओं ने उन्हें बेहद लोकप्रिय बना दिया और 28 अप्रैल 2010 से शुरू हुए विश्वास यात्रा के बाद हुए विधानसभा चुनाव में बंपर बहुमत मिला.

इसके बाद भी नीतीश कुमार लगातार यात्राओं का दौर चलाते रहे. 9 नवंबर 2011 से सेवा यात्रा, 19 सितंबर 2012 से अधिकार यात्रा पर निकले. वर्ष 2013 में एनडीए से अलग हुए फिर भी 5 मार्च 2014 से संकल्प यात्रा पर निकले. हालांकि, इस वर्ष लोकसभा चुनाव में जदयू की करारी हार हुई, लेकिन वर्ष 2014 में 13 नवंबर से वे फिर संपर्क यात्रा पर निकल गए. इसके बाद महागठबंधन का हिस्सा होते हुए उन्होंने 9 नवंबर 2016 से निश्चय यात्रा की.

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वर्ष 2017 में महागठबंधन से अलग हुए और फिर एनडीए के साथ हो लिए. इसके बाद 12 दिसंबर 2017 से विकास कार्यों की समीक्षा यात्रा पर निकले. इसके बाद 3 दिसंबर 2019 से जल-जीवन-हरियाली यात्रा पर निकले. इसके बाद 22 दिसंबर से 2021 से वे समाज सुधार यात्रा पर निकले. 15 जनवरी 2022 समाप्त हुई इस यात्रा में उन्होंने पूर्ण शराबबंदी अभियान, दहेज प्रथा उन्मूनल, बाल विवाह मुक्त अभियान से जुड़ी सरकार की महत्वपूर्ण नीतियों और निर्णयों के बारे में चर्चा की.

नीतीश कुमार की इन यात्राओं की एक खास बात यह रही कि अक्सर उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत चंपारण की धरती से की. इस पहलू को एक प्रतीक के तौर पर समझा जाता है क्योंकि महात्मा गांधी ने चंपारण से अपने सत्याग्रह की शुरुआत की थी. गांधी के राजनीतिक रास्ते और उनके सिद्धांतों को मानने का यह उनका प्रतीकात्मक प्रयास होता था. इसी तरह अब प्रशांत किशोर ने भी अपनी पदयात्रा की शुरुआत चंपारण की भूमि से करने की घोषणा की है. यानी उन्होंने नीतीश कुमार के फंडे को ही फॉलो किया है.

Tags: Bihar News, Bihar politics, CM Nitish Kumar, PATNA NEWS, Prashant Kishor

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