JNA/ पी के ठाकुर की रिपोर्ट खगड़िया चौथम ममता एचआईएमसी द्वारा चौथम प्रखंड के धुतौली पंचायत अंतर्गत ब्रह्मा ग्राम में विश्व एड्स दिवस कार्यक्रम मनाया गया। कार्यक्रम में जिला कोर्डिनेटर विवेक कुमार सिंहा, प्रखंड कोर्डिनेटर मोहन कुमार, सीएचओ धर्मेंद्र कुमार, ओआरडब्लु पाण्डव कुमार, सोनू कुमार, मुस्कान कुमारी, प्रियंका कुमारी, सेविका कुमारी किरण, आशा सुनीता कुमारी, ममता कुमारी, अनिता कुमारी, सुनीता देवी, अनिता देवी सहित सेकड़ो महिला व पुरुष उपस्थित थे। कार्यक्रम संचालन करते हुए पांडव कुमार ने कहा हर साल 1 दिसंबर को दुनिया वर्ल्ड एड्स डे मनाती है। जी हां, एक ऐसा दिन जो न सिर्फ एचआईवी/एड्स से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी है, बल्कि उन लोगों के प्रति समर्थन जताने का भी मौका है, जो इस संक्रमण के साथ जीवन जी रहे हैं। इस दिन का असली मकसद है लोगों को एचआईवी/एड्स के बारे में सही जानकारी देना, टेस्टिंग के महत्व को समझाना और इलाज की उपलब्धता के बारे में जागरूक करना।
जिला कोर्डिनेटर विवेक कुमार सिंहा ने कहा कई मिथक और गलतफहमियां लोगों के मन में मौजूद हैं, जो एड्स को खत्म करने के वैश्विक लक्ष्य को पूरा करने में बड़ी बाधा बनती हैं। बता दें, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा न रहने देने का लक्ष्य रखा है, लेकिन डर और गलत जानकारी के कारण एचआईवी से जुड़े कई मिथक आज भी समाज में मौजूद हैं। इसी वजह से वर्ल्ड एड्स डे 2025 पर इन मिथकों की सच्चाई जानना बेहद जरूरी है। सीएचओ धर्मेंद्र कुमार ने कहा हर साल 1 दिसंबर को World AIDS Day मनाया जाता है। यह दिन एचआईवी/एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इस वायरस के साथ जी रहे लोगों को सपोर्ट देने के लिहाज से बेहद जरूरी है। जब लोगों को एचआईवी/एड्स से जुड़े मिथकों और तथ्यों के बारे में जागरूक किया जाता है। वहीं, टेस्ट और इलाज के विकल्पों के बारे में भी सही जानकारी को बढ़ावा दिया जाता है। HIV और AIDS की सच्चाई जो हर किसी को जाननी चाहिए ।
एचआईवी के बारे में आज भी समाज में गलत जानकारियां फैली हुई हैं। देश में प्रगति के बावजूद, आज भी लोग इस विषय पर बात करने में हिचकते हैं। इस मौके पर HIV/AIDS से जुड़े मिथकों की सच्चाई जानना बेहद जरूरी है। सबसे पहले हमे एड्स से जुड़ी शर्म, डर और सामाजिक दूरी को खत्म करना कितना जरूरी है। कई दशकों से “एचआईवी पॉजिटिव” टैग के साथ गहरे तौर पर जुड़ी कलंक की भावना लोगों के जीवन को प्रभावित करती रही है। यह कलंक इसलिए भी बना रहता है क्योंकि अब भी बहुत से लोग नहीं जानते कि एचआईवी शरीर को कैसे प्रभावित करता है, कैसे फैलता है और किन तरीकों से इसका इलाज संभव है।
एचआईवी और एड्स एक ही चीज हैं
यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। एचआईवी संक्रमण का अंतिम चरण है, जो तभी होता है जब एचआईवी का इलाज न किया जाए और इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा कमजोर हो जाए। आज विज्ञान प्रगति के कारण एचआईवी पॉजिटिव होना एड्स का पर्याय नहीं है। सही इलाज और समय पर थेरेपी के साथ एचआईवी को एक लंबे समय तक नियंत्रित रखा जा सकता है। कुछ लोगों में वायरस शरीर में मौजूद रहता है, लेकिन अपनी प्रतिकृति नहीं बनाता- इसे डॉरमेंट या निष्क्रिय अवस्था कहा जाता है। यह स्थिति आधुनिक एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। कार्यक्रम अंत में रैली भी निकाली गई।
ममता एच आई एम सी द्वारा ब्रह्मा में मनाया गया विश्व एड्स दिवस कार्यक्रम
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