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रिटायर्ड IAS पति के PF के पैसे से अचार का काम शुरू किया, सालाना है 10 लाख रु. की कमाई

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दरभंगा. देश-दुनिया में वैसे तो मिथिलांचल की पहचान कई कारणों से होती रही है. लेकिन, इन दिनों मिथिलांचल की चर्चा दरभंगा की रहने वाली दो महिलाएं कल्पना झा और उमा झा की वजह से भी खूब हो रही है. ननद-भाभी की इस जोड़ी ने बीते कुछ महीनों में काम ही ऐसा किया है कि अब हर कोई इनके गुणगान में लगा है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के सपने को ननद-भाभी की जोड़ी कल्पना झा और उमा झा बखूबी साकार करने में जुटी हैं. इन दोनों महिलाओं ने देश-दुनिया को मिथिलांचल के अचार का स्वाद चखाया है. दोनों महिलाएं कड़ी मेहनत से इस लोकल अचार को अब देश दुनिया के पटल पर पहचान दिलाने में जुट गई हैं और शुरुआती दौर में ही न सिर्फ इन्हें अचार के व्यापार में सफलता मिलने लगी बल्कि लोग भी इनके अचार के दीवाने हो गए हैं.

इस अचार के स्वाद के साथ-साथ इसकी खासियत इसका नाम भी है. कल्पना झा और उमा झा ने अचार की ब्रांडिंग के लिए खास नाम तय किया, ‘झा जी अचार.’ फिलहाल झा जी अचार नाम से शुरू किया गया यह अचार ऑन लाइन मार्केटिंग के जरिये आम लोगों तक पहुंच रहा है. यही वजह है कि मिथिला के अचार का स्वाद अब देश दुनिया में रह रहे लोगों तक बस उनकी एक डिमांड पर न सिर्फ उनके पास होता है बल्कि इस अचार का स्वाद भी बाजार के अचार की तुलना में कुछ खास है. जैसे ही ऑर्डर किया अचार आम लोगों के घर पहुंचता है, लोग इसे खोल कर इसकी खुशबू से ही खुश हो जाते हैं.

कैसे ब्रांड बना झा जी अचार
न्यूज 18 हिंदी से खास बातचीत में कल्पना झा ने बताया, ‘झा जी’ अचार को ब्रांड बनाने की शुरुआत बिलकुल छोटे स्तर पर शुरू हुई थी. मैंने और उमा जी ने साथ में मिलकर मिथिलांचल के अचार को देशभर में प्रमोट करने की प्लानिंग शुरू की और काम में जुट गए. पहले तो कम मात्रा में अचार बनाते थे, लेकिन फिर धीरे-धीरे आस-पास के लोग, रिश्तेदार हमारे अचार के स्वाद की तारीफ करने लगे तो हम लोगों ने इसे धीरे-धीरे बड़ा रूप देना शुरू किया. जहां तक नाम का सवाल है, मिथिलांचल समेत पूरे देश में लोगों के नाम के साथ सम्मानपूर्वक ‘जी’ लगाने की परंपरा रही है. इसी तरह हमारे यहां के झा परिवार के लोगों को सभी ‘झा जी’ कहकर बुलाते है. कल्पना झा ने बताया कि क्योंकि मैं और उमा, झा परिवार से ही आते हैं, इसलिए हम लोगों ने अपने ब्रांड का नाम झा जी अचार रखा और सबसे अच्छी बात रही कि लोगों ने इस नाम को खूब पसंद किया.

झा जी अचार वालों का परिवार भी है खास
बता दें, झा जी अचार का स्वाद ही सिर्फ खास नहीं है, बल्कि इसे तैयार करने वाला परिवार भी खास है. अचार का व्यापार शुरू करने वाली 52 वर्षीय महिला कल्पना झा एक रिटायर्ड IAS की पत्नी हैं और घर में अपने खाने के लिए खुद तरह-तरह के अचार बनाया करती थीं. अब पति के रिटायर होने के बाद उन्होंने अपने इस हुनर को एक व्यवसाय का रूप अपनी भाभी उमा झा के साथ देना शुरू किया. कल्पना झा बताती हैं कि कोरोना संक्रमण के समय हम लोगों ने झा जी अचार के लिए काम करना शुरू किया और आपदा को अवसर बनाने के लिए मैंने और भाभी ने खूब मेहनत की. हमें इसमें पूरे परिवार का सहयोग भी मिला. पिछले वर्ष लॉकडाउन के समय हम लोगों ने छोटे रूप में अचार बना कर बाजार में उतारा, मांग बढ़ी तो कुछ आसपास की महिला-पुरुष, मजदूर क्लास के लोगों को भी अपने साथ जोड़ा और इसका दायरा बढ़ाया. फिर इसे एक ब्रांड का नाम दिया, सभी तरह के मापदंड के लिए कागजी प्रक्रियाओं को पूरा कर अपने अचार के कई प्रॉडक्ट को ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिये बाजार में लॉन्च किया.

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अलग-अलग फ्लेवर के अचार उपलब्ध
कल्पना झा ने बताया कि लोगों ने जब उनके अचार का स्वाद चखा तो उसे बेहद पसंद किया और फिर धीरे-धीरे तो ऑर्डर की झड़ी लग गई. उत्पादन से ज्यादा मांग होने के कारण दिन-रात अचार बनाने का काम किया जा रहा है. अब इस अचार के व्यवसाय से न सिर्फ ननद भाभी को आमदनी होने लगी बल्कि हम लोगों ने यहां 14-15 लोगों को रोजगार भी दिया. फिलहाल करीब 10 से 15 तरह के अचार हम लोग तैयार करते हैं, जिसे ऑनलाइन ऑर्डर के बाद लोगों तक पहुंचाया जाता है. आने वाले समय में कई और नए फ्लेवर के अचार तैयार किये जाएंगे. हमारे अचार अलग-अलग प्रकार के हैं जैसे आम कटहल, मिक्स अचार आदि. लोगों को झा जी अचार का स्वाद खूब भा रहा है.

अचार में क्या होता है खास
जब न्यूज18 ने कल्पना झा से पूछा कि उनके अचार में क्या खास है तो उन्होंने बताया कि सबसे खास बात यह है कि हम लोग शुद्ध देसी तरीके से ही अचार तैयार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि जो बेसिक मसाले हम लोग घर में अचार बनने के लिए तैयार करते थे, वैसे ही इस अचार को भी तैयार कर रहे हैं. हम लोगों ने मसालों व अन्य सामग्री की क्वालिटी बरकरार रखी है. अचार में इस्तेमाल किए जाने वाला तेल, हल्दी, लहसुन, नमक, सौंफ, लाल मिर्च, सरसों आदि सभी अच्छी क्वालिटी का इस्तेमाल किया जाता है.

15 लाख रुपये से कर सकते हैं शुरुआत
कल्पना झा ने इस बिजनेस को शुरू करने के लिए दूसरों लोगों को टिप्स देते हुए कहा कि शुरुआत में करीब 15 लाख रुपये की पूंजी के साथ दूसरे लोग भी इस बिजनेस को शुरू कर सकते हैं. मैंने करीब इतनी ही राशि के साथ शुरुआत की थी. शुरुआत में लाइसेंस आदि लेने में अधिक पैसा लगता है. फिर सामग्री और पैकिंग मैटेरियल में पैसे खर्च होते हैं. फिलहाल हम लोग 2 तरह के जार में अचार की डिलीवरी कर रहे हैं. 250 ग्राम का एक जार 249 रुपये का है और दूसरा 299 रुपये का है. हम लोग जल्द ही बड़े जार में भी अचार की डिलीवरी शुरू कराएंगे.

मिथिलांचल के दूसरे प्रोडक्ट भी लॉन्च करने का इरादा
झा जी अचार की शुरुआत करने वाली कल्पना झा बताती हैं कि उनके पति आईएएस पद से रिटायर हुए है. उन्होंने अपने पीएफ के पैसे से यह काम शुरू किया है. पूरी मार्केटिंग ऑनलाइन ही चल रही है. उन्होंने न्यूज 18 से बातचीत में बताया कि एक निजी टीवी शो में उनके भाग लेने के बाद न सिर्फ उनके अचार की डिमांड बढ़ गयी, बल्कि अब कई जगहों से उनकी मदद के लिए भी लोग आगे आ रहे हैं, ताकि मिथिला के इस अचार को और बड़ा स्वरूप दिया जा सके. उन्होंने कहा कि फिलहाल दस से पंद्रह तरह के अचार तैयार किये जा रहे हैं. इसके अलावा विलुप्त होते मिथिला के और भी कई घरेलू प्रोडक्ट को लॉन्च करने का इरादा है.

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विदेश तक सीधी सप्लाई की योजना
कल्पना झा ने बताया कि फिलहाल अभी देश के अलग-अलग शहरों में उनका अचार डिलीवर हो रहा है. हालांकि विदेश तक सगे-संबंधियों और दोस्तों द्वारा झा जी अचार पहुंचाया जा रहा है. लेकिन, अभी हम लोगों वे विदेश में डिलीवरी शुरू नहीं की है. उसके लिए कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है. जल्द ही विदेश में झा जी अचार की डिलीवरी होने लगेगी. कल्पना ने कहा कि इस पूरे काम में उनका पूरा परिवार उनकी बहुत सहायता कर रहा है.

आधी आबादी ने घर और बिजनेस दोनों संभाला, रोजगार भी दिया
कल्पना झा ने दूसरी महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि महिलाएं घर और बिजनेस दोनों अच्छे से संभाल सकती हैं. उन्होंने बताया कि पहले वह अपने घर, पति, परिवार और बच्चों को ज्यादा समय दिया करती थीं, लेकिन अब वह बिजनेस में भी आ गयी हैं और सभी के सहयोग से अच्छा कर रही हैं. उन्होंने कहा कि पति रिटायर हो गए और बच्चे भी अच्छी जगहों पर सेटल्ड हो गए हैं ऐसे में उनके पास अब अपने व्यापार को आगे बढ़ाने का पूरा समय है. उन्होंने इस काम में लग कर न सिर्फ अपनी आमदनी का जरिया बनाया बल्कि उन्हें संतोष इस बात से है कि कई लोगों को अपने यहां रोजगार भी दिया. जो लोग काम की तालाश में कभी बाहर जाते थे, उन्हें अपने शहर और घर में ही काम मिल रहा है जैसे जैसे काम आगे बढ़ेगा लोगों का रोजगार भी यहां बढ़ने लगेगा. कल्पना ने न्यूज18 से बातचीत में कहा कि दूसरी महिलाएं भी कभी यह नहीं सोचें कि उनसे कोई काम नहीं होगा, आधी आबादी हर कुछ कर सकती है.

ननद-भाभी की दोस्ती ने दिखाया दम
वहीं कल्पना झा की भाभी उमा झा ने बताया कि ननद-भाभी का रिश्ता बहुत पुराना है. हम दोनों रिश्तेदार के साथ-साथ पक्के दोस्त भी हैं. ऐसे में खुद दोनों ने मिलकर इस काम को आगे बढ़ाया और अब जबकि कामयाबी मिलने लगी है ऐसे में इस काम को और ज्यादा बड़े स्वरूप में करने को तैयार हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपने क्वालिटी से समझौता नहीं करने वाली हैं. बाजार के दूसरे अचार के बदले वे अपने अचार को नेचुरल रूप से लोगों के बीच परोसने का काम करेंगी. बहरहाल अपने काम से संतुष्ट कल्पना झा और उमा झा अपने व्यवसाय को अब व्यापक बड़े स्वरूप के साथ न सिर्फ मिथिला के अचार को देश विदेश में एक अलग पहचान दिलाने में लगी है बल्कि वोकल फॉर लोकल से रोजगार के भी नए अवसर का सृजन करने में लगी हैं.

Tags: Bihar News in hindi, News18 Hindi Originals, Startup Idea

न्यूज 18

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