जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद युवक क्रांति के अध्यक्ष सेवक संजय कुमार यादव के नेतृत्व में आयोजित किया गया जिसमें कांग्रेस पार्टी एवं अखिल भारतवषीॅय यादव महासभा सभा ने भी अपना समर्थन दिया । अस्पताल मोड़ से निकल गई आक्रोश मार्च अरवल मोड जाते-जाते भारी भीड़ में तब्दील हो गई, भीड़ को संबोधित करते हुए संजय यादव ने कहा की सम्मानित सांसद पप्पू यादव का कसूर इतना है कि NEET की पढ़ाई कर रही एक बेटी के साथ हुए ज.घन्य अन्याय के खिलाफ न्याय की मांग को लेकर आवाज बना रहे थे । यह आवाज सिर्फ एक बेटी की नहीं है, बल्कि पूरे बिहार की बेटियों को उन न.रभक्षियों से बचाने की है जो शोहदे,डॉक्टर, नेता, पदाधिकारी और माफिया के रूप में व्यवस्था के भीतर बैठकर बेटियों को अपना शिकार बनाते हैं। इस बेटी के साथ पहले निर्ममता से दु.ष्कर्म किया गया, फिर उसकी ह.त्या कर दी गई, और उसके बाद उसी बेटी के चरित्र पर सवाल खड़े कर दिए गए—सिर्फ इसलिए कि असली दोषी को बचाया जा सके, जो इन्हीं में से किसी ताकतवर का कुक.र्मी बेटा है।दुनिया के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है कि न्याय दिलाने के बजाय लड़ने वाले को फर्जी मुकदमा में हमेशा फसाया जाता है । करोड़ों के समय में भी पप्पू यादव एवं उनके समस्त समर्थक मानवता को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तो फर्जी मुकदमा पप्पू यादव के ऊपर लगाया गया । बिहार सरकार पुलिस को आगे करके हमेशा से लोकतंत्र की आवाज को कुचलना का काम कर रही है । जनता के टैक्स पर मोटी तनख्वाह पाने वाले पुलिस अधिकारी ने न्याय की गुहार कर रही पीड़ित परिवार से कह दिया, कि वे मान लें कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की है। जबकि उसी व्यवस्था की फोरेंसिक जांच स्पष्ट रूप से बला.त्कार की पुष्टि करती है। एक डॉक्टर कहता है- मौत निमोनिया से हुई, तो UPSC क्वालिफाई कर निष्पक्षता की शपथ लेने वाला IPS अधिकारी आत्महत्या की कहानी सुनाता है—लेकिन यह बताने की हिम्मत नहीं करता कि आत्महत्या कैसे हुई। इससे भी अधिक शर्मनाक यह है कि परिवार की सहमति के बिना प्रेग्नेंसी जांच तक कर ली गई, लेकिन IMA जैसी संस्थाएं तब खामोश रहीं। क्या मेडिकल काउंसिल इसकी इजाजत देता है? अगर नहीं तो उस डॉक्टर की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई, अभी तक? जबकी पीड़िता की आवाज पप्पू यादव के ऊपर फर्जी मुकदमा लाद कर उन्हें अरेस्ट कर लिया गया । यदि पप्पू यादव के ऊपर मुकदमा 31 साल पुरानी थी ,तो आंदोलन के समय ही इसे क्यों प्रयोग में लाया जाता है ।क्या बिहार सरकार लोकतंत्र की आवाज को हमेशा के लिए खामोश कर देना चाहती है। जो गुनहगार हैं वह सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं सरकार उनके नाम तक बेनकाब नहीं कर पा रही है यदि उन सभी को सरकार बचाना ही चाहती है तो उसे सजा मत सुनाना नाम को तो बेनकाब कर दो।आज तक डॉ. सतीश और मनीष रंजन जैसे नाम खुलेआम चर्चा में हैं, लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने में नाकाम है। उल्टा, पीड़ित परिवार को धमकाया गया, डराया गया और मानसिक रूप से तोड़ने की हर कोशिश की गई। इस मामले में इतने सवाल हैं, इतने विरोधाभास हैं कि अगर ईमानदारी से एक-एक पहलू की जांच हो जाए तो पूरा सच सामने आ जाएगा। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है की सरकार और सत्ता में बैठे लोग नहीं चाहते कि सच्चाई सामने आए, क्योंकि सच्चाई सामने आई तो उनकी पूरी सड़ांध उजागर हो जाएगी। संजय यादव ने साफ कहा की हम चाहते हैं— लोकतंत्र की आवाज सम्मानित सांसद पप्पू यादव को जल्द से जल्द सरकार रिहा करें । सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, पुलिस चाहे जितनी धमकियां दे, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। जरूरत पड़ी तो हम इससे भी बड़ी आंदोलन खड़ा करेंगे इस कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी जिला अध्यक्ष रामप्रवेश ठाकुर के नेतृत्व में पूर्व जिला अध्यक्ष हरिनारायण द्विवेदी चंद्रिका प्रसाद मंडल नगर अध्यक्ष सरवर सलीम, गौरी शंकर यादव, सुरेंद्र सिंह ,प्रवीण शर्मा, संजीव कुमार सींह, कमलेश कुशवाहा, जयशंकर शर्मा, राकेश शर्मा, हेमंत शर्मा, सुनील सिंह ,वीरेंद्र शर्मा, संतोष कुमार ,मनोज शर्मा ,रुस्तम अंसारी, राम जी बाबू एवं अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के जिला अध्यक्ष मृत्युंजय सिंह यादव के नेतृत्व में राम ध्यान सिंह ,बिहारी बाबू, दुर्गा प्रसाद, रविंद्र यादव, दिगंबर यादव, अवधेश कुमार, दिलीप यादव ,अंबिका यादव, एवं जिला परिषद भाग 2 के प्रतिनिधि साधु यादव, राहुल चंद्रवंशी सत्येंद्र यादव चुन्नू यादव विजय सिन्हा ,अजय प्रसाद पूर्व मुखिया रतनी एवं सैकड़ो कार्यकर्ता भाग लिए।


