जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद भारतीय प्रशासनिक सेवा-2024 बैच के 12 प्रशिक्षु पदाधिकारियों ने राज्य दर्शन कार्यक्रम के तहत जहानाबाद जिले में अपने आगमन के दूसरे दिन बराबर गुफाओं का परिभ्रमण किया। इस दौरान जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी द्वारा उन्हें गुफाओं के ऐतिहासिक एवं वास्तुकला संबंधी महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि ये गुफाएं भारत की सबसे प्राचीन चट्टानों को काटकर निर्मित गुफाओं में शामिल हैं। ये गुफाएं बिहार के जहानाबाद जिले में, गया से लगभग 24 किमी उत्तर में, बराबर एवं नागार्जुनी की जुड़वां पहाड़ियों में स्थित हैं। इतिहास निर्माण काल: मौर्य काल, तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व। इनका निर्माण सम्राट अशोक एवं उनके पोते दशरथ मौर्य के शासनकाल में हुआ। कुल गुफाएं: कुल 7 गुफाएं हैं। बराबर पहाड़ी: लोमस ऋषि, सुदामा, कर्ण चौपर एवं विश्वकर्मा नागार्जुनी पहाड़ी: गोपी, वडथिका एवं वपियका, उद्देश्य: इन गुफाओं को सम्राट अशोक द्वारा आजीवक संप्रदाय के साधुओं को ध्यान एवं निवास हेतु दान किया गया था, जिसका प्रमाण शिलालेखों से मिलता है। वास्तुकला की विशेषताएं, मौर्यकालीन पॉलिश: गुफाओं की दीवारों पर की गई पॉलिश आज भी शीशे जैसी चमकदार दिखाई देती है।लोमस ऋषि गुफा: इसका प्रवेश द्वार लकड़ी की झोपड़ी की शैली पर आधारित है, जिसे ‘चैत्य मेहराब’ का सबसे प्राचीन उदाहरण माना जाता है। ध्वनि प्रभाव: सुदामा गुफा में अद्भुत प्रतिध्वनि (इको) सुनाई देती है, जहां धीमी आवाज भी स्पष्ट रूप से गूंजती है। महत्व ये भारत में चट्टान काटकर निर्मित वास्तुकला के सबसे प्राचीन जीवित उदाहरण हैं। बौद्ध, जैन एवं आजीवक परंपराओं के संगम का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। अशोक के शिलालेख मौर्य काल की धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाते हैं। प्रशिक्षु पदाधिकारियों ने गुफाओं की अद्भुत संरचना को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की तथा इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसके उपरांत, जिला पदाधिकारी, जहानाबाद डॉ. प्रीति की अध्यक्षता में शैक्षणिक परिभ्रमण कार्यक्रम के तहत एक औपचारिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी प्रशिक्षु पदाधिकारियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया तथा उन्हें पूर्ण समर्पण एवं लगन के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी गई। उपस्थित प्रशिक्षु पदाधिकारी इस अवसर पर निम्नलिखित प्रशिक्षु पदाधिकारी उपस्थित रहे:
(1) श्री सूरज कुमार (गया),
(2) श्री के. परीक्षित (दरभंगा),
(3) श्री विग्नेश टी. ए. (पटना),
(4) श्री विरुपाक्ष विक्रम सिंह (मधुबनी),
(5) श्री प्रेम कुमार (मुजफ्फरपुर),
(6) सुश्री कृष्णा जोशी (बिहार शरीफ),
(7) श्री अजय यादव (बेगूसराय),
(8) श्री महेश कुमार (पूर्णिया),
(9) सुश्री प्रिया रानी (पूर्वी चंपारण, मोतिहारी),
(10) श्री जतिन कुमार (भागलपुर),
(11) श्री सैयद अदील मोहसिन (भोजपुर, आरा),
(12) श्रीमती कशिश बक्शी (सुपौल)।


