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Friday, April 24, 2026

बंगाल का पहला चरण: बंपर वोटिंग, शांत माहौल और सियासी संकेत,क्या तय हो गई सत्ता की दिशा

* 92% से अधिक मतदान ने बदली चुनावी गणित, युवा वोटर बने निर्णायक फैक्टर*
*हिंसा की छिटपुट घटनाओं के बावजूद शांतिपूर्ण मतदान, क्या एंटी-इंकंबेंसी दे रही संकेत*

 JNA/कौशल कुमार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता के हाथ में होती है। प्रचंड गर्मी, नेताओं की गरमागरम बयानबाजी और हिंसा की छिटपुट घटनाओं के बीच गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया. मोटे तौर पर अन्य वर्षों की तुलना में यह काफी शांतिपूर्ण रहा. हां ! वैसे, कई जगह राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर चुनाव में बाधा डालने का आरोप भी लगाया. कुछ मतदान केंद्रों पर इवीएम की खराब की वजह से भीषण गर्मी में परेशान मतदाताओं को मशीनें ठीक होने तक लंबा इंतजार भी करना पड़ा. खास बात यह भी रही कि वॉर रूम में बैठे भाजपा नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह चुनाव की पल-पल की खबर ले रहे थे. दूसरी तरफ तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी भी अपने नेताओं के साथ दिनभर की घटनाओं की समीक्षा कर रही थीं. इस बार पश्चिम बंगाल में वोटरों ने वोटिंग का नया रिकॉर्ड भी बना दिया है।करीब 92.69%वोटिंग हुई।चंदन चौरसिया ने कहा कि प्रथम चरण के चुनाव में युवा मतदाताओं की संख्या ठीकठाक रही है. इस बार तृणमूल और भाजपा ने अन्य दलों के मुकाबले युवाओं को आकर्षित करने में ज्यादा जोर भी लगाया है. मानना ही होगा कि आज का युवा महत्वाकांक्षी है. वह ऐसी व्यवस्था चाहता है, जिसमें उसे नौकरियां और रोजगार मिल सके. उसकी सुविधाएं बढ़ सकें।जहां तक पहले चरण के मतदान में हिंसा और दूसरी गड़बड़ियों का सवाल है, सबसे पहली खबर मुर्शिदाबाद से आयी. वहां नवगठित आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष और बाबरी मस्जिद बनाने के प्रयास में सुर्खियां बटोरने वाले हुमायूं कबीर को डोमकल और नाओदा में तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा पैदा विघ्न-बाधाओं का सामना करना पड़ा. तृणमूल समर्थकों ने उन्हें चोर-चोर कहा. प्रतिवाद में श्री कबीर धरने पर बैठ गये. इसी तरह भाजपा के भी कई उम्मीदवारों पर भी जगह-जगह छोटे-मोटे हमले हुए।आसनसोल में भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पाल पर प्रहार हुआ. उनकी कार का शीशा बुरी तरह तोड़ डाला गया. अंततः उन्हें पुलिस की शरण लेनी पड़ी. उधर, कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी भी शिकायत लिये सामने आये. उन्होंने बताया कि उनके वाहन चालक पर भी तृणमूल समर्थकों ने हमले कर दिये। पहले चरण के चुनाव में मालतीपुर में कांग्रेस नेता मौसम नूर, बहरमपुर में अधीर रंजन चौधरी, नंदीग्राम में विघटित विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे शुभेंदु अधिकारी, खड़गपुर में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, आसनसोल में भाजपा नेता अग्निमित्रा पाल, सिलीगुड़ी में भाजपा के शंकर घोष और तृणमूल के गौतम देव तथा रेजीनगर में तृणमूल छोड़ कर अलग पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर की उम्मीदवारी ने इन सीटों को हॉट सीट बना दिया. दूसरे और अंतिम चरण में कोलकाता, हावड़ा, हुगली, बर्दवान, नदिया, उत्तर व दक्षिण 24 परगना में वोट डाले जायेंगे। सर्वविदित है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. इसकी संसदीय प्रणाली हर मायने में आदर्श होने के बावजूद सत्ता की लालसा एवं राजनीतिक मतभेदों की वजह से इन दिनों बेजान-सी दिख रही है. अगर यह कहें कि भारतीय राजनीति इस समय आग्रह, दुराग्रह और पूर्वाग्रह से त्रस्त है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. जहां तक बंगाल की राजनीति का सवाल है, इसमें दो राय नहीं कि इस समय तमाम आरोप-प्रत्यारोपों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत पार्टी नेता ममता बनर्जी की लड़ाकू छवि है. सिर्फ यही नहीं, राज्य में अन्य दलों के मुकाबले तृणमूल का पार्टी संगठन अत्यंत मजबूत है. इसी के बल पर पार्टी ने एसआइआर के दौरान स्थानीय स्तर पर अपनी सांगठनिक मशीनरी को लगातार सक्रिय बनाये रखा. ठीक वैसे ही, जैसे कभी वाम मोर्चा के जमाने में पार्टी संगठन की ताकत दिखती थी. तब माकपा के कद्दावर नेता ज्योति बसु ने भी कई मुद्दों पर केंद्र की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर पार्टी का जनाधार बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभायी थी। पश्चिम बंगाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा अपनी प्रतिद्वंद्वी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभावशाली नेतृत्व को सामने रख राजनीतिक फायदा उठाने के लिए प्रयासरत है. वैसे, भाजपा के चुनाव कार्य में प्रधानमंत्री के अतिरिक्त गृह मंत्री श्री शाह व अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ ही कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी लगे हुए हैं. असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इनमें खास हैं. इनके साथ ही बंगाल भाजपा के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य भी लगातार सक्रिय हैं. वह गुरुवार को भी हर जिले की खबर लेते और आवश्यक निर्देश देते दिखे. वाम मोर्चा के अध्यक्ष विमान बसु और माकपा के राज्य महासचिव मोहम्मद सलीम भी दिनभर व्यस्त दिखे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार को भी पार्टी उम्मीदवारों की खोज-खबर लेते देखा गया। एक मजबूत धारणा यह है कि गुरुवार को हुए पहले चरण के चुनाव के तहत मतदान पर रोहिंग्या, अवैध घुसपैठ, एसआइआर, बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य और सुरक्षा आदि जैसे मुद्दों का असर रहा होगा. युवाओं से जुड़े मुद्दे भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं. प्रथम चरण के चुनाव में युवा मतदाताओं की संख्या ठीकठाक रही है. इस बार तृणमूल और भाजपा ने अन्य दलों के मुकाबले युवाओं को आकर्षित करने में ज्यादा जोर भी लगाया है. मानना ही होगा कि आज का युवा महत्वाकांक्षी है. वह ऐसी व्यवस्था चाहता है, जिसमें उसे नौकरियां और रोजगार मिले। 23 अप्रैल को बंगाल में पहले चरण के चुनाव के तहत हुई बंपर वोटिंग पर सभी चौंके हैं. दोपहर आते-आते जिस तरह पोलिंग पर्सेटेज में वृद्धि होने लगी, उस पर सभी हैरान थे. कह सकते हैं कि दोपहर में ही लगने लगा था कि कुछ अलग हो रहा है. गुरुवार को जिन 152 सीटों पर मत पड़े, वहां का कुल पोलिंग पसेंटेज 92.72 रहा. पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब नौ प्रतिशत से अधिक वोटिंग. इतने बड़े पैमाने पर वोटर्स घरों से निकले, इसकी वजह तो होगी ही. बंगाल चुनावों पर नजर रखने वालों में अधिकतर एक्सपर्ट की मान्यता है कि इस बार चुनाव आयोग ने सुरक्षा के जो इंतजाम किये, उससे आमलोगों का भरोसा बढ़ा और मतदाता बेफिक्र होकर घरों से निकले. एक लोकप्रिय धारणा यह भी है कि अगर मतदाता निडर होकर बंपर वोटिंग कर रहे हैं, तो मतलब यह कि एंटी इन्कंबैंसी जैसा एक फैक्टर काम कर रहा है. यह आमतौर पर लंबे समय से सत्तारूढ़ दलों के लिए नुकसानदेह होता है। निष्कर्ष: क्या तय हो गई दिशा, पहले चरण के मतदान ने निश्चित रूप से चुनाव की दिशा को प्रभावित किया है। बंपर वोटिंग, युवा मतदाताओं की भागीदारी और अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माहौल—ये सभी संकेत बताते हैं कि इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प और निर्णायक होने वाला है।
हालांकि अंतिम परिणाम क्या होगा, यह 4 मई को ही साफ होगा, लेकिन इतना तय है कि पहले चरण ने राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है और उन्हें अपनी रणनीतियों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

Prabhu Jee
Prabhu Jeehttp://www.jagdoot.in
ब्यूरो चीफ, खगड़िया (जगदूत न्यूज)
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