*गीता जयंती समारोह पखवाड़ा अन्तर्गत विवेकानंद केन्द्र, कन्याकुमारी,शाखा, जहानाबाद एवं स्वामी सहजानंद सरस्वती पुस्तकालय की ओर से श्रीमद्भगवद्गीता की प्रासंगिकता विषय पर पुस्तकालय सभागार में परिचर्चा का आयोजन किया गया*
जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद इस आयोजन में मुख्य वक्ता के बतौर आचार्य रंगनाथ शर्मा, पूर्व व्याख्यता ने भाग लिया। कार्यक्रम में वक्ता के बतौर प्रो डॉ रविशंकर,प्रो शम्भु कुमार ने अपनी बातें रखीं।पुस्तकालय के संयोजक राजकिशोर शर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न इस कार्यक्रम का संचालन शिक्षक अरुण कुमार ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत मांगलिक मंत्रोच्चार से हुई। तत्पश्चात श्रीमद्भगवद्गीता पुस्तक, विवेकानंद के चित्रपट एवं ऊं अंकित चित्रपट पर उपस्थित लोगों द्वारा पुष्प अर्पित किया गया।गीता से सम्बद्ध निर्धारित विषय पर विषय प्रवेश डीएवी पब्लिक स्कूल, जहानाबाद के शिक्षक डॉ अनिल कुमार ने अपनी स्वरचित गीता के दशम अध्याय का हिन्दी में काव्यानुवाद का पाठ कर किया। परिचर्चा में मुख्य वक्ता के बतौर आचार्य श्री रंगनाथ शर्मा ने गीता की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता एक असामान्य ग्रंथ है। असामान्य इन अर्थों में कि इसमें समस्त वेद,पुराण, उपनिषद् तथा षट्दर्शन का सार समाहित है।इसकी सार्वकालिक, सार्वभौमिक उपादेयता का अनुमान आप इसी से लगा सकते हैं कि इसमें ज्ञानियों के लिए ज्ञान है, भक्तों की भक्ति है, योगियों का योग है और कर्मशीलों का कर्तव्य बोध है। इसीलिए गीता को पूर्ण ग्रंथ माना गया है।प्रो डॉ रविशंकर एवं प्रो शंभु कुमार के कहने का लब्बोलुआब यह रहा कि गीता समग्र जीवन का दर्शन है। इसमें आदर्श जीवन के समस्त संदेशों समाहित है। दुःख निवृत्ति के उपाय से लेकर पाप-पुण्य, धर्म -अधर्म का संशय रहित विवेचन है। वक्ताओं ने कहा कि अज्ञान निवृत्ति के उपाय से युक्त यह ग्रंथ सभी प्रकार की जटिलतम मानसिक उलझनों का समाधान है।700 श्लोकों से युक्त यह ग्रंथ जाति, धर्म, सम्प्रदाय से परे समस्त धरा के मानव समाज के समस्त शंकाओं का समाधान है।अपने अध्यक्षीय भाषण में पुस्तकालय के संयोजक राजकिशोर शर्मा ने कहा कि जबतक मानव जाति का अस्तित्व इस धरा धाम पर है, गीता के संदेशों से मानव जाति को शक्ति मिलती रहेगी। उन्होंने कहा कि गीता प्रणयनक श्रीकृष्ण अर्जुन को माध्यम बनाकर ज्ञान, भक्ति,योग और कर्म की ऐसी शाश्वत महत्व की शिक्षा दे डाली,जो युगों – युगों तक विश्व – मानव का पथ प्रदर्शक बना रहेगा। गीता की प्रासंगिकता को केन्द्रित करते हुए उन्होंने कहा कि गीता के उपदेशों का सर्वाधिक महत्त्व कर्मशीलों के लिए है।इस रूप में गीता के संदेशों की प्रासंगिकता सबसे ज्यादा है कि मनुष्य को किसी भी परिस्थिति में अपने कर्तव्य कर्मों का परित्याग नहीं करना चाहिए। कुरुक्षेत्र के मैदान में महाभारत युद्ध के पहले दिन मोह और संशय में पड़कर कर्तव्य कर्म से विमुख हुए अर्जुन को उपदेशित करते हुए उस समय और आनेवाले समय को अन्य स्थापनाओं के साथ – साथ,जो एक स्थापना दी,उसके लिए गीता सदैव प्रासंगिक बना रहेगा।वह हऐ-संसआरई व्यक्ति बिना ही संन्यास लिए कर्म करते हुए मुक्त हो सकता है।इस मौके पर शिक्षक सुधीर कुमार, राकेश कुमार, चितरंजन कुमार चैनपुरा, सावित्री कुमारी,शहर के प्रबुद्ध नागरिक रामाशीष शर्मा, उमाकांत शर्मा, पुस्तकालय में अध्ययन रत पचासक छात्र -छत्रा एवं दर्जनों गणमान्यजन उपस्थित रहे। शांति पाठ एवं धन्यवाद ज्ञापित कर समारोह समापन की घोषणा की गई।


