जगदूत न्यूज बेगुसराय से मोo नबी आलम कि रिपोर्ट एस बी एस एस महाविद्यालय में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की सौवीं जयंती मनायी गयी। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो अवधेश कुमार सिंह ने कहा कर्पूरी ठाकुर सदैव दलित, शोषित और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए प्रयत्नशील रहे और संघर्ष करते रहे। उनका सादा जीवन, सरल स्वभाव, स्पष्ट विचार और अदम्य इच्छाशक्ति बरबस ही लोगों को प्रभावित कर लेती थी और लोग उनके विराट व्यक्तित्व के प्रति आकर्षित हो जाते थे। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उसे प्रगति-पथ पर लाने और विकास को गति देने में उनके अपूर्व योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। वहीं महाविद्यालय के एनसीसी पदाधिकारी एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ नीलेश कुमार ने कहा कर्पूरी ठाकुर का जन्म भारत में ब्रिटिश शासन काल के दौरान समस्तीपुर के एक गांव पितौंझिया, जिसे अब कर्पूरीग्राम कहा जाता है, में नाई जाति में हुआ था। उनके पिताजी का नाम श्री गोकुल ठाकुर तथा माता जी का नाम श्रीमती रामदुलारी देवी था। इनके पिता गांव के सीमान्त किसान थे तथा अपने पारंपरिक पेशा बाल काटने का काम करते थे। पिछड़ी जाति की राजनीति के पुरोधा कर्पूरी जी ने ही जाति जनगणना की बात कही थी । वहीं महाविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ अरमान आनंद ने कहा कि कर्पूरी जी को भारत रत्न से सम्मानित करने का फैसला स्वागत योग्य है। भारत के ऐसे रत्नों को सम्मानित कर सम्मान की महिमा बढ़ती है। मैं कर्पूरी जी के राजनीतिक चरित्र को उनकी विरासत समझता हूँ। उस बेदाग चरित्र पर अधिकार के लिए प्रतिस्पर्धा हो तब ही माना जायेगा कि कर्पूरी ठाकुर की विरासत का सम्मान हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य के सभी विभागों में हिंदी में काम करने को अनिवार्य बना दिया था. इतना ही नहीं उन्होंने राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान वेतन आयोग को राज्य में भी लागू करने का काम सबसे पहले किया था. वे बराबर अपने भाषण में कहते थे
उठ जाग मुसाफिर भोर भई
अब रैन कहाँ जो सोवत है
कर्पूरी जी का संघर्ष इसी भोर का संघर्ष है। उनका सन्देश है दमन की काली रात में बेसुध सोई जनता को जनजागरण का संदेश। इस अवसर पर प्रो मोहम्मद परवेज़, प्रो रुचि जैन, प्रो राजीव शर्मा, मुकेश कुमार सहित महाविद्यालय के छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।


