जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार ब्यूरो चीफ प्रभु जी खगड़िया प्रखंड अंतर्गत रानी सकरपुरा पंचायत में युवाओं व छात्राओं द्वारा शिक्षक दिवस के सुअवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया ! कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित शिक्षक शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में कहा की शिक्षक का हमारे जीवन में अमूल्य योगदान है! शिक्षकों के बिना यह मानव जीवन सार्थक नहीं है! हर किसी के जीवन में एक गुरु या शिक्षक का होना बेहद आवश्यक है! इसलिए हम सभी को सदा शिक्षकों का मान-सम्मान करना चाहिए और उनकी बातों पर अमल करना चाहिए !
आज ‘शिक्षक दिवस’ है। आज ही के दिन यानि 5 सितम्बर को महान दार्शनिक व शिक्षाविद, भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डाॅ राधा कृष्णन का जन्म सन् 1888 में तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में हुआ था जिसे ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
आज का दिन शिक्षकों को समर्पित है। इस दिन स्कूल, कॉलेज व विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में भाषण प्रतियोगिता के साथ तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें हमारे जीवन में शिक्षक के योगदान को दर्शाया जाता है। एक शिक्षक ही है जो मनुष्य को सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाता है तथा जीवन में सही और गलत को परखने का तरीका बताता है। कहा जाता है कि बच्चे के जीवन में उसकी मां पहली शिक्षक होती है, जो बच्चे को इस संसार से अवगत कराती है। फिर पिता व अन्य शिक्षक होते हैं, जो हमें सांसारिक व आध्यात्मिक ज्ञान का बोध कराते हैं। शिक्षक उस माली के समान है, जो एक बगीचे को अलग अलग रूप-रंग के फूलों से सजाता है। कबीरदास जी ने ठीक ही कहा है कि जिस प्रकार एक कुम्हार मिट्टी को बर्तन का आकार देता है, ठीक उसी प्रकार शिक्षक, छात्र के जीवन को मूल्यवान बनाता है।
वहीं विशिष्ठ अतिथि के रूप में सेवा निवृत्त शिक्षक महादेव पाठक ने अपने संबोधन में कहा की आज के समय में शिक्षा का व्यावसायीकरण हो रहा है। अनेक शिक्षक अपने ज्ञान की बोली लगाने लगे हैं। गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा है जिसके कई स्वर्णिम उदाहरण इतिहास में दर्ज हैं। लेकिन आज गुरु-शिष्य परम्परा तार-तार हो गयी है। इसे देखकर हमारी संस्कृति की इस अमूल्य गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रश्नचिह्न नजर आने लगता है। अत: विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों का ही दायित्व है कि वे इस महान परंपरा को बेहतर ढंग से समझें और एक अच्छे समाज के निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करें।
जब तक शिक्षक सही नहीं होंगे, नई पीढ़ी सही नहीं हो सकती। सही शिक्षकों के चयन से लेकर उन्हें उचित प्रशिक्षण और सम्मानजनक वेतनमानादि देना होगा, तभी शिक्षक भी अपना कार्य पूर्ण मनोयोग से कर सकेंगे। साथ ही, छात्र और अभिभावकों द्वारा उचित सम्मान भी दिया जाना चाहिए। जब गुरु-शिष्य में विश्वासपूर्ण सम्बन्ध होगा तभी हमारी नई पीढ़ी शिक्षा और ज्ञान की बुलंदियों को छू सकेगी। शिक्षण क्षेत्र के गुरुओं की लेकिन, आज के बदले हुए परिवेश में शिक्षकों को वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे हकदार हैं। एक तरफ उन्हें सरकार से उपेक्षा झेलनी पड़ रही है, वहीं छात्र और अभिभावक भी उचित सम्मान नहीं देते हैं। आये दिन शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों का शोषण एवं विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें सुनने को मिलती हैं। शास्त्रों में शिक्षक को श्रेष्ठ स्थान दिया गया है!
कार्यक्रम में उपस्थित मुकेश कुमार पासवान, अमित कुमार, सत्यपाल कुमार, देवेन्द्र कुमार, सूरज कुमार, राम शरण कुमार, अमरजीत कुमार ने भी अपने संबोधन में डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद किया !


