30.1 C
Khagaria
Thursday, May 7, 2026

एससी-एसटी संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बासुकी पासवान नहीं रहे, दलित समाज में शोक की लहर

*बासुकी बाबू का कलम और जुबान सदैव शोषितों-पीड़ितों की आवाज रही – आचार्य राकेश पासवान शास्त्री*

जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार ब्यूरो चीफ प्रभु जी खगड़िया  अखिल भारतीय एससी-एसटी संघर्ष मोर्चा के प्रदेश महासचिव सह जदयू प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि दलित-शोषित समाज की पीड़ा और न्याय की लड़ाई को अपनी कलम और अपने स्वर के माध्यम से जीवन भर अभिव्यक्त करने वाले श्रद्धेय बासुकी पासवान अब हमारे बीच नहीं रहे। कल दिनांक 25 सितंबर 2025, गुरुवार की रात लगभग 9:30 बजे हार्ट अटैक से उनका देहावसान हो गया। उनके निधन की खबर से न केवल घोरघट ग्राम बल्कि सम्पूर्ण बिहार का दलित समाज शोकाकुल है। वे अपने पीछे पांच पुत्र,दो पुत्री एवं पत्नी सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए। जदयू प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बासुकी बाबू का जीवन संघर्ष और सेवा का पर्याय रहा। वे जन्म से नहीं, बल्कि कर्म से जननायक थे।वे परवत्ता प्रखंड के कज्जलवन के दलितों समस्याओं को लेकर खगड़िया मुख्यालय में धरना प्रदर्शन का नेतृत्व भी किये थे। संक्षिप्त जीवन परिचय 1 मार्च 1954 को मुंगेर जिला अंतर्गत ऐतिहासिक घोरघट आदर्श लाठी ग्राम में स्वतंत्रता सेनानी एवं रेलकर्मी अग्रजीत पासवान के पुत्र रूप में जन्मे बासुकी पासवान किशोरावस्था से ही समाजसेवा में रमे रहे। उन्होंने अपने गाँव में पहला स्कूल खोलकर शिक्षा की अलख जगाई।
भारतीय रेल में टीटी इंस्पेक्टर पद से सेवा देने के बाद 2014 में सेवानिवृत्त हुए और फिर पूरी तरह दलित समाज के हक-अधिकार की लड़ाई में जुट गए। उन्होंने अखिल भारतीय दुसाध उत्थान परिषद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय एससी/एसटी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष रहते हुए खगड़िया, पूर्णिया, मुंगेर समेत पूरे राज्य में पीड़ित-शोषित परिवारों को न्याय दिलाने हेतु संघर्ष किया। हाल ही में पटना उच्च न्यायालय में उन्होंने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभ कोर्ट में नालसी वाद दायर पर भी सरकार मुआवजा दे इस बाबत उन्होंने एक जनहित याचिका दायर कर पीड़ितों को मुआवजा दिलाने का मार्ग खोल दिया । बासुकी पासवान एक संवेदनशील कवि और नाटककार भी थे। उनके नाटकों “हर डाल पर उल्लू”, “फूल खिलते हैं”, “काले कोर्ट में सफेद दिन”, “द अकबर रिटर्न्स”, “सुपरफास्ट” आदि ने उन्हें एक सशक्त साहित्यिक हस्ताक्षर बनाया।
उनकी कविताओं ने 1974 के छात्र आंदोलन को क्रांतिकारी धार दी। उनकी पंक्तियाँ आज भी जोश जगाती हैं ।उठो छात्रों तुम्हें क्रांति पुकारती है
तुम्हारी बाजुओं में शक्ति का सागर मचलती है। उनके नाटकों में सामाजिक विद्रूपताओं पर करारी चोट मिलती है कि आजादी की मिली दुल्हनिया उतर ना पायी डोली से, मांगे जनता रोजी-रोटी, जवाब मिलती गोली से।बासुकी बाबू का जाना दलित समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। शास्त्री ने कहा कि उनका मिशन अधूरा नहीं रहेगा। हम सब उनके सपनों को पूरा करने हेतु संकल्पित हैं। उनके निधन पर बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी, राष्ट्रीय महासचिव कुमार भानु प्रताप (गुड्डू पासवान), खगड़िया जिला अध्यक्ष कैलाश पासवान, प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार, सेवानिवृत्त डीएसपी अनिल पासवान, मनोज मधुकर,प्रो जिच्छू पासवान, सुरेन्द्र पासवान सहित कई गणमान्यजनों ने गहरा शोक प्रकट किया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

Prabhu Jee
Prabhu Jeehttp://www.jagdoot.in
ब्यूरो चीफ, खगड़िया (जगदूत न्यूज)
सम्बंधित खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

रिपोर्टर की अन्य खबरें
नई खबरें