हीरालाल यादव
छोड़ मत जब भी मिले दिल की लगी का मौक़ा
ज़िन्दगी देती नहीं रोज़ ख़ुशी का मौक़ा
जान-पहचान के दम पर तो कभी दौलत से
छीन लेता है कोई और किसी का मौक़ा
होश उड़ाने में कभी देर नहीं करता है
हुस्न पाता है अगर जादूगरी का मौक़ा
उसने बीमार की कुछ और बढ़ा दी मुश्किल
जिसने माँगा था कभी चारा-गरी का मौक़ा
अपने मतलब के लिए लोग जहां में *हीरा*
छोड़ते कब हैं कोई फ़ित्ना-गरी का मौक़ा


