जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद
स्वामी सहजानंद सरस्वती पुस्तकालय – सह- वाचनालय, जहानाबाद की ओर से पुस्तकालय सभागार में मगही साहित्य:एक विमर्श विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रोफेसर डॉ रविशंकर की अध्यक्षता में आयोजित इस वैचारिक कार्यक्रम में विमर्शकार के रूप में मगही एवं हिन्दी साहित्य के सर्जक साहित्यकार एवं पूर्व विधान पार्षद, बिहार श्री बाबू लाल मधुकर ने भाग लिया।श्री सत्यप्रकाश, स्नातकोत्तर हिंदी साहित्य के संयोजन एवं श्री सुधाकर रवि, जहानाबाद हिंदी साहित्य के भविष्य के संचालन में सर्वप्रथम मान्य अतिथि श्री बाबू लाल मधुकर जी का पुस्तकालय के संयोजक राजकिशोर प्रसाद, डीएवी पब्लिक स्कूल, जहानाबाद के शिक्षक श्री अनिल कुमार द्वारा अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के संचालक सुधाकर रवि ने श्री मधुकर जी का परिचय दिया और पुस्तकालय के संयोजक श्री राजकिशोर जी से स्वागत के दो शब्द एवं विषय प्रवेश कराने का आग्रह किया। तदोपरांत मगही साहित्य के उन्नयन के लिए प्रतिबद्ध और निरन्तर प्रयत्नशील श्री बाबू लाल मधुकर जी ने मगही साहित्य एक विमर्श के विमर्शकार के बतौर अपनी बातें विस्तार से रखी। उन्होंने कहा कि मैं मगह का बेटा हूं।मगह-जीवन, भाषा एवं लोकसाहित्य के प्रति अनुराग मुझे संस्कारगत प्राप्त है। मगही भाषा एवं साहित्य के अध्ययन – अनुशीलन की ओर मेरा नैसर्गिक प्रेम और आकर्षण रहा है। मगही-लोकगीत,मगही -लोककथा-गीत,मगही-नाट्यगीत,मगही-लोकसाहित्य का साहित्यिक सौन्दर्य का सारगर्भित ज्ञान मगही बोली में कराया। उन्होंने कहा कि मगही साहित्य को पढ़ें। पढ़ेंगे ही नहीं,तो अपनी लोकभाषा के समृद्धि का भान कैसे होगा? मगही भाषा साहित्य के विकास के लिए हर मगह -पुत्र को प्रयत्नशील होना चाहिए।व्यापक विमर्श के दौरान उन्होंने अपना संस्मरण सुनाया।इस दौरान उन्होंने कहा कि मैंने रचना क्षेत्र में राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर प्रेरणा प्राप्त कर प्रवेश किया। मगही भाषा को लेकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के सामने व्याख्यान दिया और मगही साहित्य के सौन्दर्य की ओर आचार्य श्री का ध्यान आकृष्ट कराया। राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर,राजकमल चौधरी, नागार्जुन, त्रिलोचन, रेणु, रामबृक्ष बेनीपुरी के साथ मगही साहित्य को लेकर हुए विमर्श की चर्चा विस्तार से की।विशेषकर बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ श्री कृष्ण सिंह के साथ मगही पत्रिका प्रकाशन हेतु हुए वार्ता का संस्मरण सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया।इस दौरान उन्होंने अपनी कालजयी रचना उपन्यास रमरतिया का विस्तार से जिक्र किया।पचासक हिंदी -मगही स्वरचित रचनाओं का परिचय देकर मगही साहित्य से श्रोताओं को जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान मधुकर जी ने अपने चुनिंदा मगही और हिंदी कविताओं का पाठ किया। मसीहा मुस्कुराता है,आज तुम्हें होना चाहिए था,तुम मुझसे क्या कहलवाना चाहते हो?आदि कविताओं को श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे। कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में डीएवी पब्लिक स्कूल के शिक्षक एवं मगही कवि चितरंजन चैनपुरा ने अपनी कविता बरगद के पेड़ का पाठ किया।अपने अध्यक्षीय भाषण -सह-धन्यवाद ज्ञापन के दौरान प्रो.डा.रविशंकर ने अपनी मगही कविता मगध के माटी का सस्वर पाठ किया और धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम समापन की घोषणा की।


