जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद स्थित एस. एस. कॉलेज के राजकुमारी सभागार में हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर हिन्दी विभाग तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में एक गरिमामय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अकादमिक विमर्श का केन्द्रीय विषय था – “हिन्दी में तकनीक का समावेश : संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ, इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट वक्ता के रूप में पधारे मगध विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो० (डॉ०) बी.के. मंगलम ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि हिन्दी, तकनीक के सहारे भविष्य की भाषा-संस्कृति को एक नई दिशा देने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक का समावेश हिन्दी को वैश्विक स्तर पर विस्तार प्रदान करने के अपार अवसर उपलब्ध कराता है, यद्यपि इसके साथ आने वाली चुनौतियों का विवेकपूर्ण समाधान आवश्यक है। प्रो० मंगलम ने यह भी उल्लेख किया कि तकनीकी उन्नति के कारण ही आज हिन्दी साहित्य, समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ और पुस्तकें ई-पुस्तक, ब्लॉग तथा ऑनलाइन मंचों पर सहजता से सुलभ हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो० (डॉ०) दीपक कुमार ने हिन्दी को “विविध भाषाओं का समाहार” बताया और कहा कि इसकी समावेशी प्रकृति ने इसे अन्य भाषाओं के शब्दों को भी आत्मसात करने योग्य बनाया है। उन्होंने हिन्दी को विज्ञान एवं उच्च शिक्षा के लिए अनुकूल भाषा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि प्राचीन पांडुलिपियाँ, लोकगीत एवं लोककथाएँ जैसी सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण आज तकनीक की ही देन है। हिन्दी विभाग की अध्यक्ष डॉ० नम्रता कुमारी ने अपने वक्तव्य में हिन्दी के समक्ष विद्यमान चुनौतियों की ओर ध्यान आकृष्ट किया—जैसे कि तकनीकी शब्दावली की जटिलता, डिजिटल विभाजन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंग्रेज़ी का वर्चस्व तथा इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय सॉफ़्टवेयर का अभाव, कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों के पारंपरिक स्वागत से हुआ, जिसमें प्राचार्य द्वारा अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर काफी संख्या में महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक सदस्यों की उपस्थिति रही।
हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी का भव्य आयोजन
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