जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद हाल ही में काको थाना के द्वारा किशोर न्याय नियमावली का उल्लंघन करने पर किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी निवेदिता कुमारी के द्वारा पुलिस अधीक्षक से यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि किशोर न्याय परिषद के समक्ष वे जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें कि क्यों एक बच्चे को काको पुलिस स्टेशन में रात में रखा गया और उसके साथ मारपीट किया गया ! जबकि एफ.आइ.आर और जब्ती सूची एक दिन बाद तैयार किया गया था ! पुलिस अधीक्षक और विशेष किशोर पुलिस इकाई ने अपने जांच प्रतिवेदन में बताया था कि बच्चे को डेंगू हो जाने के कारण जाँच प्रतिवेदन किशोर न्याय परिषद के समक्ष समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया ! साथ ही दोनों के द्वारा बताया गया कि पूछताछ के दौरान विधि विरुद्ध बालक एवं उनके संरक्षक ने बताया कि उसके साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई है और नाही उसके साथ कोई मारपीट हुई है ! बीते 8 जनवरी 2024 को विधि विरुद्ध बालक बोर्ड के समक्ष लिखित और मौखिक रूप से अपना बयान दिया था कि काको थाना के लोगों के द्वारा धमकाकर उससे बयान लिया गया था, बच्चे ने यह भी बताया कि उसे थाने में रखा गया था और उसके साथ मारपीट भी किया गया था !किशोर न्याय परिषद ने माना कि एक बच्चे का बयान एसपी और एसजेपीयू के जांच प्रतिवेदन से ज्यादा वजन रखता है, साथ ही किशोर न्याय परिषद ने आदेश में कहा कि एसपी एवं एसजेपीयू ने कहीं भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि बच्चे को रात में थाना में क्यों रखा गया था ! किशोर न्याय परिषद ने बिहार किशोर न्याय नियमावली 69( घ )( 4 ) प्ररूप 42 का हवाला देते हुए कहा कि यह नियम बताता है कि कोई भी विधि विरुद्ध बालक को रात में थाने में ना रख कर बाल देख-रेख संस्थान में रखना है ! परिषद ने एसपी और एसजेपीयू को यह निर्देश दिया कि अवगत करें कि कोई भी बच्चे को रात में थाना में ना रखें और दिन के समय में चाइल्ड फ्रेंडली कॉर्नर में ही रखें और सुनिश्चित करें कि थाना परिसर में दोबारा ऐसी कोई घटना ना हो ! विगत समय में थाना प्रभारी एवं पुलिस अधिकारियों के द्वारा बिहार किशोर न्याय नियमावली 2017 का नियम 8 और 9 का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है ! यह ऑफिसर बता नहीं पा रहे हैं कि पेटी और सीरियस ऑफेंस में केस क्यों दर्ज कर रहे हैं ! जबकि कोई व्यस्क व्यक्ति भी शामिल नहीं है ! कानून की जानकारी ना होना कोई एक्सक्यूज नहीं है ! परिषद ने एसपी और एसजेपीयू को यह भी निर्देशित किया कि लेटर एंड स्पिरिट में इस रूल को सुनिश्चित करें और पुलिस ऑफिसर को ट्रेनिंग करवाएं, इसके लिए बोर्ड सहायता करने के लिए हमेशा तैयार है जिससे किशोर न्याय अधिनियम का उद्देश्य पूरा हो सके !


