*बीजेपी की 207 सीटों की जीत के बाद संवैधानिक गतिरोध की आशंका*
कोलकाता, 7 मई 2026 अरुण कुमार वर्मा,संपादक,जगदूत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति को अनिश्चितता के मोड़ पर ला खड़ा किया है। बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है।ममता बनर्जी ने जनादेश को स्वीकार करने के बजाय इसे चुनाव आयोग और बीजेपी की “साजिश” करार दिया। उन्होंने कहा कि वे नैतिक रूप से नहीं हारी हैं और अपनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट में लड़ेंगी। टीएमसी विधायकों की बैठक में उन्होंने पार्टी नेताओं से विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराने की अपील भी की। दूसरी ओर, राज्यपाल ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार गठन की स्थिति स्पष्ट नहीं होती है तो विधानसभा भंग करने पर विचार किया जा सकता है। इससे बंगाल में राष्ट्रपति शासन या कानूनी दांवपेच की स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है। क्या कहता है संवैधानिक प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 174 और 356 के तहत राज्यपाल को विधानसभा भंग करने और राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए ठोस संवैधानिक आधार जरूरी होता है। चुनाव परिणामों को चुनौती देने का रास्ता पहले चुनाव आयोग और फिर अदालत में खुला होता है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने पर कानूनी लड़ाई लंबी खिंच सकती है। सियासी असर, अगर ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट जाती हैं तो यह मामला सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा। 2026 के चुनाव नतीजों और INDIA गठबंधन की रणनीति पर भी इसका असर पड़ेगा। बीजेपी ने इसे जनादेश का अपमान बताया है और कहा है कि लोकतंत्र में हार स्वीकार करना भी एक परंपरा है। अब सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी का यह कदम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ लाएगा, या अदालत का फैसला स्थिति साफ करेगा।


