जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद
*नागरिक विकास मंच की काव्य संध्या में राष्ट्रकवि दिनकर को भी कवियों ने किया स्मरण*
जहानाबाद नागरिक विकास मंच द्वारा आयोजित पाक्षिक काव्य गोष्ठी में आज 30 अप्रैल को रामजन्मभूमि आंदोलन की वीरांगना अन्नपूर्णा केसरी तथा संस्कृत के मर्मज्ञ आचार्य पं. मृत्युंजय जी को श्रद्धांजलि दी गई। कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से उनके योगदान को याद किया। होइहि सोइ जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साखा।कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ पत्रकार संतोष श्रीवास्तव के आवास पर किया गया। इसकी अध्यक्षता मगध विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी साइंस विभाग से जुड़े प्रकाश चंदा ने की, जबकि संचालन मंच के सचिव संतोष श्रीवास्तव ने किया। निर्गुण भाव जिंदगी एक सराय है, कौन यहां ठहरा है, नाम वही अमर हुआ, जिसने जग में कुछ किया है।इस अवसर पर कवियों ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को भी श्रद्धापूर्वक याद किया, जिनकी पुण्यतिथि इसी माह 24 अप्रैल को थी। दिनकर जी की प्रसिद्ध पंक्तियां: क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो। तीन लोक में धाक उसी की, जिसका मस्तक ऊँचा हो, विनम्र वही, जो शक्तिशाली, जग में जिसका पूँजा हो।कार्यक्रम में कवि एवं साहित्यकार सुधाकर राजेंद्र ने भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पत्रिका “आजकल” मंच संचालक संतोष श्रीवास्तव को भेंट की। इस अवसर पर सुधाकर राजेंद्र,वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार गुप्ता, विश्वजीत अलबेला, चितरंजन चैनपुरा, रोहित कुमार पांडेय, गौतम पराशर, अजय विश्वकर्मा, सुनील कुमार श्रीवास्तव और एस.के. मिर्जा सहित कई कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। राम नाम मणि दीप धरु, जीह देहरी द्वार। तुलसी भीतर बाहेरहुं, जो चाहसि उजियार , कार्यक्रम का समापन श्रद्धांजलि और काव्य पाठ के साथ हुआ, जिसमें साहित्य और संवेदना का सुंदर संगम देखने को मिला।


