*कर्पूरी जी के शिष्यों ने उनके सपनों को चकनाचूर किया, निलेश*
जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार ब्योरो चिप प्रभु जी खगड़िया जन अधिकार पार्टी द्वारा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के 100वीं जयंती पर हाजीपुर स्थित जिला कार्यालय में उन्हें श्रद्धांजलि दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देने के पश्चात जाप नेता अभय कुमार गुड्डू ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे, लेकिन परिवार को विरासत में देने के लिए एक मकान तक उनके नाम नहीं था। उनके सादगी पूर्ण जीवन से बिहार ही नहीं संपूर्ण देश अवगत है। कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री रहते हुए भी रिक्शे से सफर किया करते थे। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री रहते कभी भी अपने परिवार सगे संबंधियों के हित में कोई भी काम ना कर हुए सदैव बिहारवासियों के हित में कई महत्वपूर्ण काम करने का काम किए थे। मुख्यमंत्री काल में जब उनके बहनोई नौकरी के लिए सिफारिश करने के लिए कहा तो कर्पूरी ठाकुर ने अपनी जेब से पचास रुपए निकालकर उन्हें देकर कहा जाइए इससे उस्तरा खरीद कर अपना पुश्तैनी धंधा आरंभ कीजिए। वहीं जन अधिकार युवा परिषद के प्रदेश सचिव निलेश कुमार यादव ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर को अपना गुरु मानने वालों ने जब बिहार के गद्दी पर आसीन हुआ तो वह सीधा कर्पूरी जी के विचारों के विपरीत काम कर उनके सपनों का चकनाचूर किया। वर्तमान समय में सिर्फ वोट की राजनीति के लिए विभिन्न दलों के नेता कर्पूरी ठाकुर के नाम की माला जपते हैं। वास्तव में कर्पूरी ठाकुर के विचार को आत्मसात कर जन अधिकार पार्टी के सुप्रीमों पूर्व सांसद पप्पू यादव ने शोषित-पीड़ित व्यक्ति के पीड़ा को कम करने का काम कर रहे हैं। कर्पूरी ठाकुर की तरह पप्पू यादव भी पटना दिल्ली में घर जमीन नहीं खरीद कर बिहार के जरूरतमंद लोगों को सहयोग करना ही अपना धर्म मान लिए हैं। उन्होंने कहा कि आज के नेताओं से ने कर्पूरी ठाकुर के सपना को साकार करने के बजाय चकनाचूर करने का काम किया है। वहीं जन अधिकार पार्टी के कोषाध्यक्ष नीरज कुमार यादव और मानसी के प्रखंड अध्यक्ष मनीष सम्राट ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर के विचारों की जितना भी चर्चा की जाए कम होगा। एक बार मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके क्षेत्र के जमींदार ने उनके पिता को सेवा करने के लिए बुलाया। जब वह बीमार होने के चलते नहीं पहुंच पाए तो जमींदार ने अपने लठैतों से मारपीट कर उन्हें लाने का आदेश दिया। इसकी सूचना जब प्रशासन को हुआ तो प्रशासन ने लाठैतों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन सादगी के प्रतीक कर्पूरी ठाकुर ने उन्हें बेशर्त छोड़ने का आग्रह करते हुए कहा कि पता नहीं कितने लाचार और असहाय शोषित लोग प्रतिदिन लाठियां खाकर दम तोड़ते हैं। उन जुल्मी को क्यों नहीं गिरफ्तार करते हैं, क्योंकि वह मुख्यमंत्री के पिता नहीं है। आखिर सामान्य जनता को कौन बचाएगा। उन्होंने पुलिस अधिकारी से कहा कि जाओ प्रदेश के कोने-कोने में शोषण उत्पीड़न के खिलाफ अभियान चलाओ और एक भी परिवार सामंतों के जुल्मों सितम का शिकार ना हो पाए, सुनिश्चित करो। तभी मेरे पिता पर जूल्म करने वाले को गिरफ्तार करना।यह कहकर कर्पूरी ठाकुर ने अपने पिता पर जुल्म करने वाले लठैतों को भी छुड़ा दिए।


