जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार ब्यूरो चीफ प्रभु जी खगड़िया हिन्दी भाषा साहित्य परिषद, खगड़िया के बैनर तले हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर विचार गोष्ठी सह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।इस विचार गोष्ठी का विषय था-वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिन्दी का भविष्य और चुनौतियां।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता चंद्रशेखरम् ने की तो मंच संचालन पूर्णिया से पधारे के के चौधरी ने किया।कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए प्रो कपिल देव महतो ने भारतेंदु हरिश्चंद्र को याद करते हुए कहा हमारी भाषा समय के साथ सतत् परिवर्तनशील है यही कारण है कि यह निरंतर पुष्पित पल्लवित हो रही है।शंकरानंद ने कहा कि भाषा मनुष्य की अनिवार्य पूंजी है।भाषा के बिना उसका कोई अस्तित्व नहीं है।हिन्दी की विशेषता उसका लचीलापन है।रामकृष्ण आनंद ने कहा आज के भारत की जो दशा दिशा है वही हिन्दी की भी दशा दिशा है। जैसे जैसे हमारा विकास होगा वैसे ही हमारी भाषा का भी विकास होगा।सनोज कुमार शर्मा ने कहा कि कार्यालयों में भी हिन्दी के व्यवहार पर बल देने की आवश्यकता है।सुभाष चंद्र जोशी ने कहा कि भाषा के महत्व पर बात करते हुए कहा कि जिसके पास भाषा नहीं होगी वह आसानी से गुलाम बन जाएगा। सुनील कुमार मिश्र ने कहा कि हिन्दी हमारी अस्मिता से जुड़ी भाषा है इसलिए इसका भविष्य उज्ज्वल है।रिजवान अहमद ने कहा कि हिन्दी की जड़ें बहुत गहरी हैं यही कारण है कि यह भाषा बहुत कोमल, मधुर और सहज ग्राह्य है।इसे सीखना बहुत कठिन नहीं है। यही कारण है कि दुनिया भर में इसके बोलने वाले बढ़ रहे हैं।विचार गोष्ठी के बाद कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।अर्णव आनंद ने इस आयोजन में पहली बार काव्य पाठ किया और सबने उसकी सराहना की।इस आयोजन में भाग लेने वालों में शंकरानंद,उधव कुमार,संध्या किंकर,मनीष कुमार,सनोज कुमार शर्मा,शशि शेखर,पुष्पा कुमारी,रामसचित पासवान,सुनील कुमार मिश्र ,रिजवान अहमद,चंपा राय,स्वराक्षी स्वरा आदि प्रमुख थे।देर रात तक श्रोताओं ने वाहवाही की।धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संध्या किंकर ने आगत अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया।
महासचिव
संध्या किंकर
हिन्दी भाषा साहित्य परिषद, खगड़िया


