जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद
स्थानीय आर्य समाज मंदिर जहानाबाद में नव विक्रम संवत्सर 2081 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 150वां आर्य समाज स्थापना दिवस के अवसर पर प्रातः काल सामूहिक वैदिक महायज्ञ आयोजन किया गया ।
सर्वप्रथम ईश्वरस्तुतिप्रार्थना उपासना के वैदिक मत्रों से नव संवत्सर मंगलमय हो इसकी प्रार्थना की गई ।
तत्पश्चात स्वस्तिवाचन के मंत्र से सारे जगत के कल्याण के कामना की गई। इसके बाद वेद मंत्रों से सब लोगों ने आहुति प्रदान की । नव संवत्सर के विषय में व्याख्या करते हुए अनिल आर्य ने बताया कि आज ही के दिन ब्रह्मा जी के द्वारा सृष्टि की रचना की गई थी । मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी का राज्याभिषेक भी आज ही के दिन हुआ था । युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी आज ही के दिन हुआ था और महर्षि स्वामी दयानंद के द्वारा 149 वर्ष पूर्व आर्य समाज की स्थापना मुंबई में की गई थी । जिसका मुख्य उद्देश्य वेदों का प्रचार जन-जन तक वेदों को ज्ञान को पहुंचाना एवं सनातन वैदिक संस्कृति से सबको अवगत कराना था । जो लोग अपने संस्कृति से दूर हो रहे थे उसे पुनः वैदिक धर्मी बनाना था । इसके लिए उन्होंने वेदों की ओर लौटो का नारा दिया । आज हम सब समाज के सभी वर्गों तक स्वामी दयानंद के संदेश को पहुंचने का कार्य करें । इसी के लिए स्वामी दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना की थी।
वही सुश्री मोनी आर्यणी ने बताया कि यह भारतीय नव वर्ष जो है वह वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर भी सही है इस समय प्रकृति में सब कुछ नया हो जाता है सारी पृथ्वी के पेड़ नए पत्तों से सज जाते हैं नए फूल लग जाते हैं नए फल आ जाते हैं यह नववर्ष प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक नई उमंग भर देता है किसानों के घरों में नई फसल आ जाते हैं । भारत के विभिन्न प्रदेशों में इस नव वर्ष को लोग अलग-अलग नाम से जानते हैं हम सब को यह नव वर्ष हर्षो उल्लास के साथ मनाना चाहिए । यज्ञ की समाप्ति शांति पाठ एवं ओम जय घोष के साथ किया गया । सब लोगों ने एक दूसरे को नव वर्ष की शुभकामनाएं प्रदान की । इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री अजय आर्य श्री विनोद चंचल सुश्री चांदनी आर्यनी श्री आशुतोष कुमार, श्री राजू प्रसाद, श्रीमती सुनीता जी आदि आर्य सज्जन एवं देवी उपस्थित रहे ।
वही सांयकाल आर्य समाज जहानाबाद के तत्वाधान में श्री अनिल आर्य के आचार्यत्व में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा स्थानीय थाना रोड मोहल्ले में वैदिक यज्ञ कर नव वर्ष मनाई गई ।