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Sunday, April 19, 2026

काव्य-गोष्ठी में गूंजा स्मृतियों का स्वर, निर्गुण में झलकी ममता की डोर

जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख 

*स्व. चन्द्रकांति श्रीवास्तव की पुण्यतिथि पर भावों से भीगा जहानाबाद का छोर*

जहानाबाद नागरिक विकास मंच की पाक्षिक काव्य गोष्ठी इस बार कुछ अलग ही रंग में सजी। मंच पर कविता थी, सुर थे, और यादों की ऐसी हल्की चुभन भी थी, जो दिल को नम कर दे। अवसर था जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े संतोष श्रीवास्तव की माताजी स्व. चन्द्रकांति श्रीवास्तव की 18वीं पुण्यतिथि का, जिसे साहित्य और संगीत की श्रद्धांजलि के साथ याद किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के उपाध्यक्ष डॉ. अरविंद चौधरी ने की, जबकि संचालन स्वयं संतोष श्रीवास्तव ने किया। मंच पर बैठे साहित्यकारों ने कहा—
“माँ का नाम जब मंच पे आया,
तो हर दिल में एक दीप जलाया।”

गोष्ठी में आरा के विशेष लोक अभियोजक (उत्पाद) योगेश्वर प्रसाद उर्फ हीरा जी,वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार गुप्ता, वयोवृद्ध साहित्यकार सत्येंद्र कुमार मिश्र, लोकगायक विश्वजीत अलबेला, शिक्षिका रूबी कुमारी, सुनील कुमार श्रीवास्तव (मामा जी), उद्घोषक व गायक एस. के. मिर्जा, शिक्षाविद संतोष शर्मा, लोक कलाकार मुकेश जी (मुखिया जी), अमला श्रीवास्तव और श्रृषीराज श्रीवास्तव सहित कई साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। कविता और गीतों की महफ़िल में जब निर्गुण गूंजा तो माहौल कुछ ऐसा हो गया कि
“शब्द थे कम, भाव थे ज्यादा,
आँखों में भी एक सागर था। मगही गायक विश्वजीत अलबेला, अरविंद कुमार आज़ाद, कवियत्री रूबी मैडम’ मुकेश जी उर्फ मुखीया जी अजय विश्वकर्मा और एस. के. मिर्जा ने गीत-कविता के माध्यम से श्रद्धा के फूल अर्पित किए। उनके सुरों में माँ की ममता, यादों की गरमाहट और जीवन के संस्कारों की खुशबू साफ महसूस हुई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा—
“माँ का जीवन सादगी की गाथा,
संस्कारों का दीप जलाता।
ऐसे जीवन की स्मृति में,
हर दिल श्रद्धा से झुक जाता।”

गोष्ठी में हल्की मुस्कान और भावुकता दोनों साथ-साथ चलती रही। किसी ने कहा—
“कविता भी थी, संगीत भी था,
यादों का संसार भी था।
माँ के नाम की इस सभा में,
हर दिल थोड़ा कर्ज़दार भी था।समारोह के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि स्व. चन्द्रकांति श्रीवास्तव के सादगी, सेवा और संस्कार के मूल्यों को आगे बढ़ाया जाएगा—ताकि स्मृतियों का यह दीपक आने वाली पीढ़ियों तक रोशनी देता रहे। स्व. चन्द्रकांति श्रीवास्तव की स्मृति में निर्गुण, चन्द्रकांति माई के नेह असीम, जग में उजियार फैलाय। ममता के सागर गहर गहीरा, सबके दुख हरषाय। सादा जीवन, उज्जर मनवा,
नेकी के दीप जलाय।

आशीष बन आजो बसलीं माई,
छाया संग निभाय।

Prabhu Jee
Prabhu Jeehttp://www.jagdoot.in
ब्यूरो चीफ, खगड़िया (जगदूत न्यूज)
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