जगदूत न्यूज बेगुसराय से मोहम्मद नबी आलम कि रिपोर्ट बेगुसराय जिला अन्तर्गत बरौनी प्रखंड के सिमरिया दो पंचायत के वार्ड नं दो, रूपनगर निवासी जनकवि रामावतार यादव ” शक्र” जी की १०९ वीं जयंती के अवसर पर जनकवि शक्र स्मृति व्याख्यान सह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया,जिसका विषय ” वर्तमान समय में संवेदना का संकट” रखा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गंगा धर पासवान ने किया तथा मंच संचालन युवा कवि संजीव फिरोज ने किया। मुख्य अतिथिद्वय जन लेखक संघ के डा० राजकुमार आजाद एवं जनवादी लेखक संघ के प्रदेश सचिव कुमार विनिताभ मुख्य वक्ता सच्चिदानंद पाठक, विशिष्ट अतिथिगण केदारनाथ भास्कर, विश्वंभर प्रसाद सिंह, अवधेश कुमार विन्द, राजेन्द्र राय, शंकर सिंह, कृष्ण नंदन यादव, राकेश कुमार आदि कवियों ने संबोधित किया।
डा० आजाद ने संबोधित करते हुए कहा कि
” चमरे की अच्छी पहचान चमार को होती है,
लोहे की अच्छी पहचान लोहार को होती है,
सोने की अच्छी पहचान सोनार को होती है,
लेकिन हीरे की पहचान ना तो चमार को होती है,
हीरे की पहचान ना तो लोहार को होती है,
हीरे की पहचान ना तो सोनार को होती है,
हीरे की पहचान तो सिर्फ और सिर्फ,
किसी जौहरी के किस्मत में होती है।
कुमार विनिताभ ने संबोधित करते हुए कहा कि
” जिन्हें कहा जाना था अभिधा में/ उन्हें लक्षणा में व्यक्त किया जा रहा है/जिन्हें करना था प्रतिरोध/वे तालियां बजा रहे हैं/ सचमुच समय संगीन हो गया है।
सच्चिदानंद पाठक ने संबोधित करते हुए कहा कि संवेदना जीवंत समाज का प्राण है और प्रमाण भी।
सामाजिक कार्यकर्ता रामानंद यादव ने सभी अतिथियों को पुष्पों की माला पहनाकर स्वागत किया।
शक्र जी की १०९ वीं जयंती के अवसर पर जनकवि शक्र स्मृति व्याख्यान सह कवि सम्मेलन का आयोजन किया
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