जगदूत न्यूज़ एजेंसी
पत्रकार नगर, खगड़िया।पढ़ो पढ़ाओ पढ़ने दो, देश को आगे बढ़ने दो का जुमला अब कागजों में ही दम तोड़ने लगा है। क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांव तो ऐसे हो गए हैं, जहां शिक्षकों के पहुंचना किसी त्योहार की खुशी का अहसास करता है। शिक्षकों में यहां देर से आना और जल्दी आना बदस्तूर जारी है। समाजसेवियों और बच्चों के अभिभावकों में बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है। लोगों ने यहां चंद मिनटों के लिए आने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया है।ग्रामीणों ने कहा है कि क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की मनमानी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां शिक्षकों के अप-डाउन करने से वह देर से आते हैं और जल्दी चले जाते हैं। शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी औचक निरीक्षण करने की औपचारिकता पूरी करते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि निर्देशों की उड़ाई जा रही धज्जियां मध्य विद्यालय जहाॅंगीरा शोभनी में 10:00 बजने को है अभी तक बच्चे जो है बाहर में ही खेल रहे हैं टीचर का कोई ध्यान नहीं रहता है बच्चे जो है में रास्ते पर दौड़ते रहते हैं जिससे उसकी किसी वक्त गाड़ी से एक्सीडेंट हो सकता है लापरवाह प्रिंसिपल और टीचर सिर्फ ऑफिस में बैठे रहते हैं कई दिन पूर्व एमडीएम भी बंद रखा था जिसमें बच्चा को खाना खाने के लिए अपने घर जाना पड़ता था इस समय ने कुछ ग्रामीणों ने प्रिंसिपल से सवाल जवाब किया तो प्रिंसिपल ने कुछ पदाधिकारी का ध्वज देते हुए कहा कि आपको जिसको कहना है कह दीजिए मेरा कोई कुछ नहीं कर पाएंगे।ऐसे अनेक ग्रामीण स्कूलों में शिक्षक और शिक्षकाएं समय पर स्कूल नहीं जाते यहां हस्ताक्षर कर दोपहर साढ़े तीन बजे तक स्कूल छोड़ देते हैं। शासन की अनेक योजनाएं जहां दम तोड़ रही हैं, वहीं बच्चों के भविष्य पर इसका गहरा असर देखा जा रहा है। उनका कहना है कि एक तो वैसे ही यहां शिक्षकों की कमी है, उस पर जो है वो भी समय पर नहीं आते।ग्रामीणों की मानें तो स्थानीय स्कूलों सहित यहां ग्रामीण क्षेत्रों में बनें प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में करोड़ों रुपये की लागत से शौचालयों का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन इन स्कूलों में पानी की कमी के कारण यह शौचालय नुमाईशी बनें हुये हैं। यहां स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को दूर करने की दिशा में अब तक ठोस कदम न उठाये जाने से बच्चों की समस्याएं यथावत बनी हुई हैं। कहा है कि कहीं स्कूल भवन जर्जर है तो कहीं शिक्षकों की कमी है। इसके साथ ही जहां छात्र-छात्राएं अधिक हैं वहां शिक्षक कम हैं और जहां शिक्षक पर्याप्त हैं तो वहां छात्र-छात्राएं कम हैं। ग्रामीणों ने स्कूलों की बुनियादी समस्याओं को दूर करने की मांग की है, जिससे बच्चों की पढ़ाई हो सके और शासन की मंशा पर पानी न फेरा जा सके।
शिक्षकों की मनमानी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है,निर्देशों की उड़ाई जा रही धज्जियां
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