जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद एक तरफ़ सौगात-ए-मोदी के नाम पर दिखावे की राजनीति की जा रही है, तो दूसरी तरफ़ ईद की नमाज़ को लेकर माहौल बिगाड़ने की कोशिशें हो रही हैं।
गोडी मीडिया और नोएडा मीडिया डिबेट के नाम पर नफ़रत फैला रहा है, और कुछ बीजेपी नेता और यूपी के सीएम माहौल में तनाव घोल रहे हैं।
लेकिन सच सबको पता है—भारत के मुसलमानों के सिर्फ़ दो ही त्यौहार होते हैं, और दोनों शांति के प्रतीक हैं।
✅ ना कोई हुड़दंग, ना कोई उपद्रव, बस नमाज़ और दुआ।
✅ ना कोई दिखावा, ना कोई ज़बरदस्ती, बस इबादत और इंसानियत। फिर क्यों हर साल ईद को लेकर नफ़रत फैलाई जाती है?
क्यों मुसलमानों की धार्मिक आज़ादी पर सवाल उठाए जाते हैं?
क्यों हर इबादत को शक की नज़रों से देखा जाता है?
हमारी माँग साफ़ है—
⚡ हमें सौगात नहीं, बराबरी का हक़ चाहिए।
⚡ हमें दान नहीं, हमारे धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा चाहिए।
⚡ हमें चुनावी राजनीति नहीं, देश में अमन-चैन चाहिए। ईद हमारे लिए सिर्फ़ एक त्यौहार नहीं, बल्कि भाईचारे, मोहब्बत और अमन का पैग़ाम है। इसे राजनीति से दूर रखें! हमें सौगात नहीं, हमारा हक़ चाहिए!
इधर “सौगात-ए-मोदी” बाँटने का दिखावा किया जा रहा है, और उधर मस्जिदों के बाहर नारेबाज़ी हो रही है, दरगाहों पर भगवा झंडे लहराए जा रहे हैं। क्या यही “सबका साथ, सबका विकास” है? क्या यही “अमन-चैन” का वादा था?
आज हमें फिर से अपने प्रधानमंत्री से अपील करनी होगी:
“सर! हिंदुस्तान के मुस्लिमों की हिफ़ाज़त कीजिए। इस नफ़रत और भेदभाव को कम कीजिए। हमें रमज़ान किट नहीं चाहिए, हमें अपना हक़ चाहिए!”
क्या यह देश सिर्फ़ एक वर्ग का हो गया है?
आज हालात यह हैं कि सत्ता की राजनीति ने हिंदू-मुस्लिम के बीच दरारें और गहरी कर दी हैं।
✅ कहीं हमारे धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
✅ कहीं समुदाय विशेष को दबाने की साज़िशें हो रही हैं।
लेकिन सवाल उठता है—क्या यह देश सिर्फ़ एक वर्ग का हो गया है?
क्या मुसलमान इस देश के बराबर के नागरिक नहीं हैं?
रमज़ान किट नहीं, बराबरी का हक़ चाहिए!
हर चुनाव से पहले हमें “सौगात” देकर चुप कराने की कोशिश की जाती है,
लेकिन अब यह भ्रम टूट चुका है।
हमें खैरात नहीं, न्याय चाहिए।
हमें दान नहीं, बराबरी का हक़ चाहिए।
हमें सुरक्षा चाहिए, डर से आज़ादी चाहिए।
“सर! आप 140 करोड़ भारतीयों के प्रधानमंत्री हैं, सिर्फ़ एक वर्ग के नहीं।
अगर आप देश को सही मायनों में आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो
⚡ नफ़रत और भेदभाव की राजनीति को बंद करें।
⚡ हमें भी इस देश का नागरिक मानें।
⚡ हमारे अधिकारों की रक्षा करें।
हमें चुनावी तोहफ़े नहीं, संविधान से मिला हक़ चाहिए!”
अब समय आ गया है कि हम अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाएँ।
✅ हम शांति चाहते हैं, लेकिन अपने सम्मान के साथ।
✅ हम अपने धर्मस्थलों की हिफ़ाज़त चाहते हैं, लेकिन अपने अधिकारों के साथ।
✅ हम देश की तरक्की चाहते हैं, लेकिन समानता के साथ।
“अगर सरकार सच में सबका साथ चाहती है,
तो उसे सबका हक़ भी सुरक्षित रखना


