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Thursday, April 30, 2026

बिहार की 113वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहे हैं

जगदूत न्यूज अनिल गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद हम बिहार की 113वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहे हैं। 22 मार्च 1912 को बिहार को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर एक स्वतंत्र राज्य बनाया गया था, और तब से लेकर आज तक यह भूमि संघर्ष, समृद्धि, संस्कृति और सादगी का प्रतीक बनी हुई है। बिहार दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत को याद करने और आने वाले समय में इसे और अधिक ऊँचाइयों तक ले जाने का संकल्प है। बिहार का इतिहास अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायक रहा है। यह वही भूमि है, जहाँ से लोकतंत्र की अवधारणा जन्मी और वैश्विक स्तर पर फैल गई। यहां प्राचीन काल में मगध साम्राज्य की स्थापना हुई, जिसने मौर्य और गुप्त वंशों के शासनकाल में अपार उन्नति की। सम्राट अशोक ने इसी भूमि से अहिंसा और बौद्ध धर्म का संदेश पूरी दुनिया को दिया। राजा जनक की विदेह नगरी से लेकर नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात शिक्षा केंद्र बिहार की विद्वता का प्रमाण हैं। यह भूमि गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली भी रही है, जिन्होंने सिख धर्म में अद्वितीय योगदान दिया। वहीं, शेरशाह सूरी जैसे कुशल शासक ने यहाँ से प्रशासनिक सुधारों की नींव रखी। बिहार के निर्माण में कई महापुरुषों का योगदान रहा है। मुंगेर से प्रकाशित ‘मुर्ग़-ए-सुलेमान’ अखबार ने सबसे पहले अलग बिहार की आवाज़ उठाई। सर अली इमाम, डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा, मज़हरुल हक़, हसन इमाम, दीप नारायण सिंह, राजेंद्र प्रसाद और मुहम्मद फ़ख़्रुद्दीन जैसे महान विभूतियों ने बिहार की स्थापना और उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इतिहास गवाह है कि बिहार ने हर कठिन परिस्थिति में अपनी राह खुद बनाई है। चाहे स्वतंत्रता संग्राम हो या सामाजिक सुधार की बात, बिहारवासियों ने सदैव अपने संघर्ष से मिसाल पेश की है। बिहार केवल ऐतिहासिक धरोहरों का केंद्र ही नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का भी वाहक है। यहां की लोककला, संगीत, नृत्य और त्योहारों की धूम देशभर में प्रसिद्ध है। छठ महापर्व, नालंदा उत्सव, सोनपुर मेले जैसी परंपराएँ हमारी संस्कृति की जीवंत मिसाल हैं। यहाँ की मिट्टी ने कालिदास, विद्यापति, भिखारी ठाकुर, रामधारी सिंह दिनकर और फणीश्वरनाथ रेणु जैसे साहित्यकार दिए हैं, जिनकी कृतियाँ आज भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई, आज बिहार के लोग दुनिया भर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व, वेस्ट इंडीज और अन्य देशों में बिहार के लोग शिक्षा, विज्ञान, व्यापार, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में सफलता की नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। राज्य भी विकास की ओर अग्रसर है। कृषि, उद्योग, शिक्षा, और बुनियादी ढांचे में बदलाव हो रहे हैं। बिहार के युवाओं को अवसर मिल रहे हैं और वे अपने राज्य के नाम को रोशन कर रहे हैं। बिहारी होना केवल एक पहचान नहीं, बल्कि एक अनुभूति है। यह जुड़ाव की भावना है, जो हमें एक-दूसरे के साथ जोड़े रखती है। जब कोई बिहारी अपनी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त करता है, तो यह पूरे बिहार के लिए गर्व की बात होती है। हमें अपने अतीत से सीख लेकर एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ना है। इस बिहार दिवस पर हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने बिहार को और आगे ले जाने के लिए मेहनत करेंगे। शिक्षा, स्वच्छता, तकनीक, और आत्मनिर्भरता के क्षेत्रों में सुधार लाकर बिहार को और समृद्ध बनाएंगे। बिहार हमारी जड़ है, हमारी पहचान है। इस पावन दिवस पर सभी बिहारवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ, हर कदम पे रास्ता दिखाया बिहार ने,
जमहूरियत का पाठ पढ़ाया बिहार ने। बिहार दिवस: गौरवशाली इतिहास और उज्जवल भविष्य का प्रतीक सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

 

Prabhu Jee
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ब्यूरो चीफ, खगड़िया (जगदूत न्यूज)
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