*साइंस में आशीष को 453 और मैट्रिक में आरती को 468 अंक, समाहरणालय में डीएम-एसपी ने किया सम्मानित—दोनों का सपना सिविल सर्विस*
जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार ब्यूरो चिप प्रभु जी खगड़िया जिले के गोगरी प्रखंड के पौड़ा गांव से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां भाई-बहन की जोड़ी ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता का नया इतिहास रच दिया है। डी.एन.आर.के. हाई स्कूल, बसुआ कोयला के छात्र आशीष कुमार और उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय, पौड़ा की छात्रा आरती कुमारी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिला टॉप-10 में अपनी जगह बनाई है। आशीष कुमार ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी) की इंटरमीडिएट (साइंस) परीक्षा में 453 अंक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। वहीं उनकी छोटी बहन आरती कुमारी ने मैट्रिक परीक्षा में 468 अंक लाकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। दोनों की इस उल्लेखनीय सफलता के लिए बुधवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में डीएम नवीन कुमार और पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने प्रशस्ति पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान दोनों छात्रों की उपलब्धि की सराहना करते हुए अधिकारियों ने इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया। आशीष कुमार गोगरी प्रखंड के पौड़ा गांव निवासी संजीत कुमार उर्फ संजीव यादव एवं पूर्व पंचायत समिति सदस्य सोनी देवी के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के सहयोग को दिया। आशीष फिलहाल इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य सिविल सर्विस में जाकर देश की सेवा करना है। वहीं आरती कुमारी, जो आशीष की छूटी बहन हैं, ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन से यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भी माता-पिता, गुरुजनों और परिवार को दिया। आरती का सपना भी सिविल सर्विस में जाकर देश सेवा करना है। उन्होंने कहा कि निरंतर अभ्यास और समर्पण ही सफलता की कुंजी है। दोनों भाई-बहन की इस सफलता से पूरे पौड़ा गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। पौड़ा गांव के आशीष और आरती ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे जिले के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है।


