*खेल कूद से विकसित होती है नेतृत्व के गुण व त्वरित निर्णय लेने की क्षमता: रवि पाण्डेय*
*खेलोगे कूदोगे तो बनोगे नबाव: रवि पाण्डेय*
जगदूत न्यूज नेटवर्क
आज कल खेल देखने को मिल रहा है कि बच्चे मैदानी खेल से दूर और मोबाइल व इंटरनेट ऑनलाइन गेम में अधिक रुचि दिखा रहे हैं और माता पिता भी उसे नज़रअंदाज़ कर दे रहे हैं। जिसके कारण बच्चों कि व्यवहार साहित शारीरिक दुर्बलता व अनुशासन में कमी देखी जा रही है।इस विषय पर चर्चा करते हुए वरीय शारीरिक शिक्षा शिक्षक व शिक्षाविद एवं पूर्व एन सी सी अधिकारी रवि भूषण पाण्डेय कहते हैं, खेलोगे कूदोगे तो बनोगे नबाव। पहले का जमाने में खेल कूद को ज्यादा प्रोत्साहन नही मिलता था और ना ही सरकार से कोई सहयोग इसके बावजूद हमारे अभिभावक हमे शारीरिक मेहनत सम्बन्धित खेल से जुड़ने या खेलने के लिए उत्साहित करते थे। परन्तु आज के परिवेश में माँ बाप बच्चों को बचपन में हीं मोबाइल उपलब्ध करा दे रहे हैं, जिससे बच्चों में मैदानी खेल के प्रति रुचि कम होती चली जा रही है और ऑनलाइन गेम की तरफ ज्यादा । जिससे बच्चे ऑनलाइन गेम के कारण दुर्घटना के शिकार भी बनते चले जा रहे हैं ।
खेल कूद शिक्षा एवं प्रशिक्षण का उद्देश्य बहुत हीं स्पष्ट है कि बालक-बालिकाओं का सर्वांगीण विकास कर उन्हे देश की संस्कृति और पूर्वजों की पारम्परिक खेल कूद व विधा से जोड़ना है। साथ हीं बच्चों में विनम्रता, सामाजिकता,राष्ट्र भक्ति की भावना के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता व एकीकरण सहित उन तमाम गुणों का अंकुरित करना हैं। जिससे वह एक कर्मठ व ईमानदार, यशस्वी नायक बन देश और समाज सेवा कर राष्ट्र के नवनिर्माण मे अपना गरिमामय सहभागिता स्थापित कर सकें।
जैसा कि कहा गया है कि *स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है*। यह शास्वत सत्य है।
वास्तव में देखा जाये तो बच्चों के सर्वांगीण विकास में खेल कूद का विशेष महत्व है।
कोई भी मैदानी खेल बच्चों के शारीरिक मजबूती, सहनशक्ति, धैर्य, जानने कि जिज्ञासा, समय प्रबंधन, त्वरित निर्णय लेने कि क्षमता, नेतृत्व कौशल,रणनीति, आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास विकसित करने में मदद करने सहित बहुत उपयोगी क्षमता व गुणों को विकसित करता है। देखने व सुनने को मिलता है कि कितने बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों को घर के कमरे तक समित रखते हैं एवं उन्हे खेल मैदान में जाने नही देते हैं।
मै सभी अभिभावक एवं माता पिता से निवेदन करना चाहूंगा कि अपने बच्चों को किसी न किसी मैदानी व शारीरिक मेहनत वाला खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
अब तो केंद्रीय सरकार सहित सभी राज्य सरकारें भी खेल कूद को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न प्रकार कि योजना चला रखी है।
विद्यालय में भी बच्चों को पढ़ाई के बोझ से हल्का करने, तरोताज़ा एवं मनोरंजन हेतु एक घंटी खेल कूद के लिए आवंटित किया है जिससे छात्र पुनः पढ़ाई के लिए तैयार हो जाएँ।


