जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार ब्यूरो चीफ प्रभु जी खगड़िया बचपन प्ले स्कूल खगड़िया में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव का आयोजन किया गया। बचपन प्ले स्कूल खगड़िया ने जन्माष्टमी उत्सव के दौरान यही प्रयास किया है कि बच्चों का जीवन अध्यात्म एवं कर्म के प्रमुख सिद्धांतों से परिचय कराया जाए इन नए कर्म जोगियो के सहारे पूरे भारत को एवं विश्व को शांति एवं विश्व को सद्भाव के जरिए सुंदर एवं पूर्ण बनाया जा सकने में प्रयास किया जाए।
बच्चों को स्कूल में श्री कृष्ण के अवतार एवं उनकी कथाओं के बारे में बताया गया माखन चोरी की कथा जंगल में गायों को चराने के लिए ले जाना कालिया नाग और बहुत से दुष्ट राक्षस को मारने वाली कथाओं में बच्चे विशेष रूप से दिलचस्पी ले रहे थे। इस अवसर पर बच्चों ने केक काटकर श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाया । सूरदास की कविताओं तथा मीराबाई के गीतों से पूरा वातावरण गूंज रहा था। बच्चे इन प्रस्तुतियों से मंत्र मुक्त हो रहे थे।नन्हे बच्चों को इन कथाओं के जरिए मानव जीवन में फैली विसंगतियों को दूर करने का जज्बा पैदा किया जा सके और प्रेरित किया जाए कि वह समाज को सुधारने में सहयोग कर सके। बचपन प्ले स्कूल में दही हांडी का भी आयोजन किया गया था जिसे फोड़ कर उसे निकले चॉकलेट बच्चों ने आपस में बाट कर खुशी व्यक्त किया। स्कूल की मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीमती पुष्पा कुमारी ने कहा कि आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण के व्यक्तित्व के कई आयाम हैं। उनकी संपूर्ण जीवन-यात्रा और उनके संबंध हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं। उनके रिश्तों से हमें प्रेम, विश्वास, सहयोग, मार्गदर्शन और क्षमा के महत्व के बारे में सीखने को मिलता है।जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था; इसे गोकुलाष्टमी भी कहा जाता है।
कृष्णष्टमी एक संस्कृत यौगिक शब्द है जिसमें कृष्ण और अष्टमी शब्द शामिल हैं। स्कूल के डायरेक्टर प्रद्युम्न कुमार ने कहा कि बच्चों नेश्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पूरे भारत वर्ष में विशेष महत्व है. यह हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है. ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था. अमीर-गरीब सभी लोग यथाशक्ति-यथासंभव उपचारों से योगेश्वर कृष्ण का जन्मोत्सव मानते हैं। स्कूल के सारे बच्चे श्री कृष्ण,राधा,रानी ग्वाल-वाल के भेष में स्कूल आए। श्री कृष्णा रूपी बच्चों के मुकुट पर सजे मोर पंख को देखकर बच्चों का दिल हर्ष और उल्लास से भर उठा। कुल मिलाकर कार्यक्रम अपने उद्देश्य में सफल रहा इसे सफल करने में स्कूल के टीचर का रोल महत्वपूर्ण रहा अभिभावकों का भी भरपूर स्नेह और सम्मान मिला।


