प्रभाकर सिंह नवगछिया भागलपुर,बिहार
चंद्रयान की जय हो
अब तो तेरे चंदा मामा
इसरो खोले पोल।
दूध भात की वही कटोरी
बोल बोल रै बोल।
आरे आवो वारे आवो
माता के वह गान।
प्यारे मामा देखो आए
गुमसुम उनके शान।
बच्चे भी सरपट जान चुके
चंद्र पे चंद्रयान।
चंदा मामा कैसे बोलू
गिर गिर जाते मान।
धरती वाली तेरे धारण
बस जायेंगे लोग।
ग्रीन ग्रीन दुनिया बोलेगी
अब मुहूर्त योग।
भारत गाथा गाती दुनिया
वहां तिरंगा आज।
पाक चीन देखे टुकुर टुकुर
और बदन है लाज।
प्रभाकर सिंह
Naugachiya
भागलपुर,बिहार


