अतुल मल्लिक “अनजान”
कैसे करूं ?धन्यवाद गुरूवर!
कैसे कहूं ? गुरूवर आभार!
किया आपने जो उपकार
कैसे कहूंगा? गुरूवर आभार!
भटक रहा था,पल-पल, दर-दर
था जीवन अंधकार गुरूवर !
कृपाकर गुरूवर राह बताया
कैसे कहूँगा? आभार गुरूवर!
है प्रार्थना सदैव ख्याल रखना
अपने श्रीचरणों का दास रखना
नहीं हटाना कभी ध्यान हमसे
बस यह दीजिए वरदान गुरूवर।
बस,यही दीजिए गुरूवर वरदान!
कैसे करूं? धन्यवाद गुरूवर!
कैसे कहूं? गुरूवर आभार!
किया आपने जो उपकार
कैसे कहूंगा? गुरूवर आभार!
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