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Saturday, April 18, 2026

मरकजी खानकाह फरीदिया जोगिया शरीफ में अदा की गई रमजान के आखिरी जुमे की नमाज, रो पड़े इमाम

*मरकजी खानकाह ए फरीदिया जोगिया शरीफ में ईद की नमाज़ सुबह 07:30 बजे अदा की जायेगी*

 जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार से अमित जी कि रिपोर्ट खगड़िया अलौली साहसी पंचायत के *मरकजी खानकाह फरीदिया जोगिया शरीफ* में रमजान के आखरी जूमे की नमाज़ अदा की गई ।रमजान के आखिरी जुमे के मौके पर *गौसिया जामा मस्जिद* में दोपहर को जुमातुल-विदा की नमाज अदा की गई। इस विशेष नमाज के पहले *गौसिया जामा मस्जिद के इमाम हजरत बाबू सईदैन फरीदी*
ने जुमातुल-विदा का खुत्बा पढ़ा और नमाज के बाद अमन व खुशहाली की दुआएँ माँगी गई।रमजान खत्म होने के बाद मनाई जाने वाली ईद-उल-फित्र की तैयारियाँ इन दिनों जोरों पर हैं।आगे उन्होंने कहा कि तीसरे अशरे के आखिरी जुमे को अलविदा का जुमा कहा जाता है। जुमा अलविदा के बाद ही ईद का त्योहार आता है।नमाज- ए- अलविदा जुमा को लेकर *गौसिया जामा मस्जिद* में सुबह से ही चहल-पहल देखी गई। खास कर बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया। छोटे-छोटे बच्चे नए-नए कपड़े पहन कर नमाज-ए-अलविदा जुमा अदा की। अलविदा जुमा की नमाज अदा करने के लिए नमाजी पूर्वाह्न 11 बजे से ही मस्जिद में दाखिल होने लगे थे।अलविदा जुमा के अवसर पर उपस्थित नमाजियों को *बाबू सईदैन फरीदी*
ने कहा कि आज हम सभी रमजान- उल- मुबारक को अलविदा कहने के लिए इकट्ठा हुए हैं। हम सभी लोगों को सिर्फ रमजान-उल- मुबारक को अलविदा कहना है न कि नमाज को। उन्होंने कहा कि जिस तरह रमजान- उल- मुबारक के दौरान लोग खुदा की इबादत करने के साथ ही नमाज अदा करते थे। उसे जारी रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हर मुसलमान को जकात व फितरा निकाल कर गरीबों में तकसीम करनी चाहिए। ताकि गरीब व असहाय लोग भी खुशी-खुशी ईद का त्योहार मना सकें। उन्होंने कहा कि जो शख्स अपने माल का जकात निकालता है। उसका माल पाक व साफ हो जाता है। साथ ही उसके माल में बरकत होती है। उन्होंने कहा कि जो रोजेदार सदका-ए- फितर अदा नहीं करता है। उसका रोजा आसमान व जमीन के बीच लटका रहता है। उसका रोजा खुदा की राह में कबूल नहीं होती है
*मरकजी खानकाह फरीदिया के वालीअहद हजरत बाबू सिबतैन फरीदी*
ने कहा कि रमजान- उल- मुबारक महीना के दौरान एक ऐसी रात आती है। जो हजार रातों से बेहतर है। इस रात को शब- ए- कद्र के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इस रात में लोगों को खुदा को ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए। माह- ए- रमजान में ही कुरआन- ए- पाक को उतारा गया। उन्‍होंने कहा कि रमजान के महीने में रहमतों की बारिश होती है। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। साथ ही जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिये जाते हैं। इसके अलावा शैतान को कैद कर दिया जाता है। उन्‍होंने कहा कि रमजान का महीना खुदा का पसंदीदा व महबूब महीना है।बताते हैं कि वैसे लोग जो हज करने के काबिल नहीं हैं अगर वे भी जुमे के दिन पूरे एहतराम के साथ नमाज अदा करें, तो उन्हें हज करने के बराबर ही सवाब मिलता है।आगे बताते हैं कि रमजान में हर जुमे की अपनी अहमियत है. लेकिन मुस्लिम समुदाय के लिए अलविदा जुमा एक अलग ही महत्व रखता है. अलविदा जुमा को अरबी में जमात-उल-विदा भी कहा जाता है.
अलविदा जुमा अदा करने के बाद लोगों ने खुदा से दुआएं की।

Prabhu Jee
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ब्यूरो चीफ, खगड़िया (जगदूत न्यूज)
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