*मुरासी के जयजयराम राम के पत्नी काजल कुमारी थी तीन बच्चे की मां,परिजन मौत के कारण का नही दे रहे हैं सही जानकारी,पुलिस ने हंगामा को कराए शांत*
JNA/सुमलेश कुमार
खगड़िया बेलदौर तीन बच्चे की गर्भवती मां की अचानक हुई मौत से परिजनों में चित्कार मचा हुआ है।जानकारी के मुताबिक सोमवार के सुबह बेला नौवाद पंचायत के मुरासी गांव निवासी जयजयराम राम के पत्नी काजल कुमारी के पेट में अचानक दर्द होने लगा तो परिजन के द्वारा सुबह लगभग 6 बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलदौर में उन्हे भर्ती कराया गया। वही बताया जा रहा है की डॉक्टर के द्वारा ससमय उक्त गर्भवती मरीज का उचित इलाज नहीं होने की स्थिति में प्रसुता दर्द से काफी कराह रही थी। जिस कारण वह नजदीक के प्राइवेट क्लीनिक आयुष हॉस्पिटल में जैसे ही भर्ती हुआ कि अचानक उनकी मौत हो गयी। वहीं परिजनों के द्वारा आयुष हॉस्पिटल के डॉक्टर पर मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर काफी हो हंगामा किए जाने लगा। वही इस बात की जानकारी बेलदौर थाना अध्यक्ष परशुराम सिंह को हुई तो उन्होंने अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मी को घटनास्थल पर भेज कर मामले को शांत करवाए। फिर इस बात की जानकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर मुकेश कुमार को हुई तो वह अपनी पूरी टीम के साथ उक्त हॉस्पिटल जाकर उनका निरीक्षण किए। जहां उक्त अस्पताल में एक भी डॉक्टर को नहीं देख मुकेश कुमार काफी गुस्से में आए और वहां उपस्थित डायरेक्टर विकास कुमार को तुम-ताम करने लगे। वही डायरेक्टर विकास कुमार एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर मुकेश कुमार के साथ लगभग 10 मिनट तक खूब नोक-झोंक होते एक दूसरे को आंख भी दिखाया गया अंत में मामले को उपस्थित लोगों के द्वारा शांत की गई। जहां एक तरफ आयुष अस्पताल के डायरेक्टर विकास कुमार यह कहते हुए सुनाई दिए की जिस महिला की मौत हमारे अस्पताल में होने की बातें सामने आ रही है वह कुछ देर पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही भर्ती थी जहां उनका इलाज सही तरीके से सही समय पर नहीं हुई जिसकारन बिना डिस्चार्ज किए मरीज खगड़िया जा रहे थे। वहीं जब मरीज की स्थिति गंभीर हो गई और वह रास्ते में ही दम तोड़ दिए इस स्थिति में परिजन के द्वारा खगड़िया ले जाने के दौरान उनके अस्पताल के नजदीक आए अंदर गए और उनके ऊपर तरह-तरह की आरोप लगाए जाने लगा। फिर स्थानीय प्रशासन एवं लोगों के द्वारा सभी को समझा बूझकर मामले को शांत की गई । वही डॉक्टर मुकेश कुमार काफी गुस्से में दिखे और उक्त आयुष अस्पताल के डायरेक्टर को अस्पताल संचालित करने हेतु सभी डॉक्यूमेंट दिखाने के लिए कहा गया जिसको डायरेक्टर उस वक्त नहीं दिखा सके बाद में सभी कागजात दिखाने की बातें कहा गया।संभवतः एक दो दिन बाद आफिस में डाकोमेंट दिखाया जा सकता है। अब सवाल उठता है कि जब सोमवार के सुबह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दर्द से कराह रही पीड़िता भर्ती हुई तो उनका इलाज सही से क्यों नही किया गया?बिना डिस्चार्ज किए बिना किसी आदेश और निर्देश के कैसे उस अस्पताल से मरीज बाहर आ गए?कैसे और किसके ईशारे पर प्राइवेट क्लीनिक में भर्ती हुई? जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लगभग आधे दर्जन सुरक्षा गार्ड को तैनात किया गया है? कई ममता आशा एन एम डॉक्टर स्वास्थ्य कर्मी भी अपनी ड्यूटी पर तैनात थे? तो फिर बीमार महिला को उनके परिजन कैसे अस्पताल से बाहर ले आए? इसका जिम्मेदार कौन-कौन हैं? क्या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलदौर के सभी गार्ड एवं ड्यूटी पर तैनात आशा ममता एन एम एवं चिकित्सा प्रभारी ड्यूटी पर नही थे? अगर थे? तो फिर कैसे मरीज बाहर आए?क्या इन लोगों की लापरवाही इसमें नहीं है? वही लोजपा रामविलास के वरिष्ठ नेता गौतम पासवान ने बताया कि जब पीड़ित महिला सुबह 6:00 बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हुई तो फिर बिना डिस्चार्ज किए हुए अस्पताल से बाहर कैसे हो गई? क्या कोई भी डॉक्टर या आशा या एन एम या कोई भी कर्मी उक्त स्वास्थ्य केंद्र में अपने ड्यूटी पर तैनात नहीं थे? अगर थे तो फिर किसी ने क्यों नहीं देखा? इसकी जांच उन्होंने जिला पदाधिकारी एवं सिविल सर्जन खगड़िया से करवाने की मांग किए हैं।


