जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार से पि के ठाकुर कि रिपोर्ट
*पत्रकारों की सुरक्षा की गारंटी हो, पत्रकार सुरक्षा कानून बने – अरुण वर्मा*
*पत्रकारों की हत्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हत्या एवं बढ़ते अपराध पर जल्द रोक लगाए सरकार – किरण देव यादव*
*शहीद पत्रकार का प्रतिमा स्थापित किया जाए – पांडव ठाकुर*
*पत्रकारों के सवाल पर सभी पत्रकार एवं संगठन एकजुट हो – सतीश आनंद*
*21 अगस्त को पत्रकारों की हत्या के खिलाफ एवं हक हकूक अधिकार के सवाल को लेकर डीएम के समक्ष धरना प्रदर्शन सभा करने का बैठक में लिया निर्णय*
पी के ठाकुर, पत्रकार नगर,खगड़िया। अखिल भारतीय मिशन पत्रकार संघ, ऐम्पा एवं ऑल रिपोर्टर्स यूनियन ऑफ नेशन के संयुक्त बैनर तले अररिया जिला के रानीगंज थाना अंतर्गत प्रेम नगर के एक दैनिक अखबार के पत्रकार विमल कुमार यादव को अपराधियों द्वारा गोली मारकर हत्या करने के विरोध में बैठक एवं शोक सभा की गई जिसमें घटना की एक स्वर में घोर निंदा किया गया। वही शोक सभा का आयोजन करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई तथा शहीद पत्रकार विमल कुमार यादव अमर रहे, शहीदों तेरे अरमानों को मंजिल तक पहुंच जाएंगे, का नारा बुलंद किया गया। वही पत्रकारों ने पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने, पत्रकारों की सुरक्षा की गारंटी देने, दोषी की जल्द गिरफ्तारी करने, आश्रितों को नौकरी एवं ₹20 लाख रुपए मुआवजा देने, घटना की उच्च स्तरीय जांच करने, पत्रकारों पर हो रहे हमले हत्या फर्जी मुकदमा पर रोक लगाने की मांग सरकार से किया।
शोक सभा की अध्यक्षता ऑल रिपोर्टरस् यूनियन ऑफ नेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण कुमार वर्मा ने किया तथा मंच संचालन ऑल इंडिया मिशन प्रेस एसोसिएशन के राष्ट्रीय संरक्षक संस्थापक अध्यक्ष किरण देव यादव ने किया।
शोक सभा में वरिष्ठ पत्रकार सतीश आनंद, युवा पत्रकार पांडव ठाकुर, समाजसेवी उमेश ठाकुर, गुड्डू ठाकुर ,श्रवण ठाकुर ,डॉक्टर संतोष कुमार ,विनय कुमार, निशांत आनंद ,जगदीश ठाकुर प्रशांत कुमार ,बृजेश विभु, कौशल कुमार, सुरेश नायक, अरविंद वर्मा, इंदु प्रभा, अभिषेक राज ,प्रवीण प्रियांशु, हेमंत कुमार ,अभिनंदन कुमार, अमरेश कुमार ,अमरीश यादव, धर्मेंद्र कुमार ,सुनील कुमार, नीतू देवी, देवजी, राजा वर्मा महेश कुमार ,अविनाश कुमार आदि ने घटना की घोर निंदा करते हुए पत्रकारों को हक व अधिकार के सवाल को लेकर संगठित होकर आंदोलन तेज करने का अपील किया । वहीं पत्रकारों की दिशा दशा पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ, जहां न पहुंचे सरकार, वहां पहुंचे पत्रकार, का हालात दयनीय हो चुकी है, तलवार के बजाय कलम उठाने वाले पत्रकारों की हत्या, लोकतंत्र की हत्या है। कलमकार को तलवार उठाने को मजबूर नहीं करें, इसलिए सरकार से मांग है कि बढ़ते अपराध पर अंकुश लगाई जाए।


