जगदूत न्यूज (अनिल कुमार गुप्ता )ब्यूरो प्रमुख .जहानाबाद
आखिर लोकतंत्र में चुनी हुई सरकारें इतना संवेदनहीन कैसे हो सकती है
मणिपुर में कुकी महिलाओं के साथ किए गए अमानवीय कृत्य पर देश के प्रधानमंत्री की चुप्पी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। आखिर लोकतंत्र में जनता के द्वारा चुनी गई सरकारें इतनी संवेदनहीन कैसे हो सकती है? उक्त बातें जाने माने शिक्षाविद् एवं बिहार प्रदेश कांग्रेस पार्टी के पॉलिटिकल अफेयर कमिटी के सदस्य डॉक्टर चंद्रिका प्रसाद यादव ने कही।
उन्होंने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले ढाई _ तीन महीनों में कभी भी नफरत और हिंसा को वहां रोकने की अपील नहीं की। इस बाबत श्री यादव ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री जी को अपने फर्ज के मुताबिक मणिपुर में हो रही हिंसा के मद्देनजर एक अदद शांति की भी अपील नहीं की जानी चाहिए थी?लेकिन उनके द्वारा ऐसा नहीं किया जाना देश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसके खिलाफ देश के तमाम लोगों से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कुकी महिलाओं का भीड़ के साथ नग्नता का वीडियो देश के सामने आया, उसी दिन पूरे देश का सिर शर्म से झुक गया। दरअसल, यह घटना चार मई की बताई जा रही है लेकिन यह अपने आप में बेहद संदेहास्पद है कि सरकार के द्वारा इस मामले पर 21 जून को संज्ञान लिया जा रहा है। वो भी तब, जब सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होता है।। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बीच देश के प्रधानमंत्री यूरोप और अमेरिका तक का टूर कर आए लेकिन उनके पास मणिपुर के लिए न तो वक्त है और न ही कोई शब्द। इससे इतर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मणिपुर का दौरा भी किया और लोगों से वहां शांति बनाए रखने की भी अपील की। लेकिन ये अच्छे दिन लाने वाली सरकार कितनी संवेदनहीन है इसका जीता जागता उदाहरण है मणिपुर।
आखिर वहां की सरकार और पुलिस ऐसे मौके पर क्या कर रही थी? उन्होंने सवाल किया कि क्या वहां की चुनी हुई बीजेपी की सरकार का इस मामले में कोई दायित्व नहीं बनता? आखिर अभी तक उक्त घटना के दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित क्यों नहीं की गई? श्री यादव ने आरोप लगाया कि इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों ही जगह की सरकारें बराबर की जिम्मेदार हैं। इधर, डॉक्टर यादव ने इस मामले में देश के सर्वोच्च न्यायालय का आभार व्यक्त किया और कहा कि न्यायालय ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए त्वरित सुनवाई का आदेश दिया है और कोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब तलब करते हुए इसकी सुनवाई की तारीख 28 जुलाई को मुकर्रर भी कर दी है। जो की एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद ही सराहनीय कदम है।
बहरहाल, उन्होंने मांग की कि किसी भी परिस्थिति में उक्त अमानवीय घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सरकार सुनिश्चित करे।


