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Sunday, May 3, 2026

जहानाबाद सदर अस्पताल जाने का एकमात्र रास्ता बना तालाब

जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद 

जहानाबाद जिले के एक मात्र सदर अस्पताल, जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या मे मरीज इलाज हेतु आते हैं। पर॑तु मुख्य सड़क से सदर अस्पताल जाने का एकमात्र रास्ते की स्थिति बद से बद्तर हो गई है, जिसके कारण इलाज कराने आए मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।हल्की सी बारिश और मानो यह अस्पताल नहीं तालाब है। आप इस तस्वीर को देख समझ सकते हैं कि इलाज हेतु जाने के पूर्व आपको भी इसी तालाब रूपी रास्ते से होकर गुजरना को पड़ेगा। लोगों का कहना है कि जहानाबाद स्वास्थ विभाग काफी लापरवाह हो गया है। मरीजों की चिंता नहीं है, जबकी सरकार द्वारा लाखों रुपए अस्पताल के रख रखाव के लिए दिए जाते हैं।जिले में स्थित सदर अस्पताल आजकल तालाब का रुप ले लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वर्षा न होने पर तो पानी ही पानी दिख रहा है,और जब वर्षा होने लगी तो स्थिति और बद से बद्तर हो सकती है। आपको बता दूं कि ना तो ही जहानाबाद में के सदर अस्पताल में ना ही अच्छे रास्ते की सुविधा है ना ही वहां पिछले कई महीनो से ECG की सुविधा है और ना ही आम मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा है आखिर जिले की अस्पताल के यह दुर्दशा क्यों.?ना तो साफ सफाई पर ध्यान दिया जाता है ना ही वहां के मरीजों के प्रति ध्यान दिया जाता है। बता दूं कि आप कभी भी जनरल वार्ड से लेकर इमरजेंसी वार्ड जाकर देखें तो आपको वही हाल मिलेगा। अस्पताल में किसी भी वार्ड का ना तो बिस्तर सही रहेगा और ना ही बिस्तर साफ सुथरा मिलेगा जिसके लिए लाखों का फंड सरकार द्वारा खर्च किया जाता है है। आखिर यह फंड का इस्तेमाल कहां किया जा रहा है, क्या केवल काम के नाम पर थाना पूर्ति की जा रही है?जिला अधिकारी के निर्देश देने के अनुसार भी उनकी बातों को देख कर किनारा किया जा रहा है और वहां के कर्मचारी अपने मनमानी करने में लगे हुए हैं। कभी-कभी डॉक्टर का अभाव भी हो जाता है। रात्रि में हमेशा वहां वार्ड बॉय से लेकर नर्स की समस्या हमेशा बनी रहती है आखिर मरीज कहां जाए? वहां के कर्मचारी भी आपसे ढंग से पेश नबी आते और ना ही किसी भी बात का सही जवाब से देने का प्रयास करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मरीज कितना भी सीरियस हो, मरीज को खुद डॉक्टर के पास आना पड़ता है ना ही डॉक्टर उसके पास जाते हैं। यहां तक कि मरीज अगर स्ट्रेचर पर है तो उसके लिए कोई भी वार्ड बॉय नही है और मजबूरन मरीज के परिजनों को ही स्ट्रेचर खींचना पड़ता है।सबसे बड़ी बात सदर अस्पताल की आपको बता दे कि मैनेजमेंट के नाम पर खाना पूर्ति की जाती है और यहाँ मैनेजमेंट कभी कोई भी चीज को देखने का एवं सही करने का प्रयास नहीं करते हैं। बता दूं कि मैनेजमेंट की लापरवाही काफी ज्यादा बनी रहती है। जिससे आम जिले वसिओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

Prabhu Jee
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ब्यूरो चीफ, खगड़िया (जगदूत न्यूज)
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