जगदूत न्यूज जहानाबाद नेटवर्क
★ओबीसी आरक्षण खत्म करने के लिए सीधे तौर पर बिहार सरकार दोषी है.
अरवल जिले में चौकीदार बहाली के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं.लेकिन बहाली प्रक्रिया को ओबीसी आरक्षण बिना लागू किए जारी है.इस बहाली में ओबीसी आरक्षण को खत्म किए जाने के खिलाफ अरवल संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित विरोध प्रदर्शन में सामाजिक न्याय आंदोलन बिहार के तरफ से समर्थन जताते हुए हमने कहा कि परंपरागत तौर पर चौकीदारी में दो जाति के लोग ही मुख्य तौर पर हुआ करते थें.दलित समुदाय से पासवान और ओबीसी से यादव .इन जाति को संघर्ष करने की माद्दा रखने के वजह मार्सल कॉम माना जाता रहा है.चौकीदारों को राज्यकर्मी का दर्जा देने के लिए भोजपुर के समाजवादी नेता राम अवधेश सिंह यादव लड़ते रहें थें.वही लालू यादव जी के द्वारा चौकीदारों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया गया था.अभी जब बिहार सरकार राज्यकर्मी के बतौर चौकीदारों की बहाली कर रही है तो ओबीसी आरक्षण ख़त्म कैसे कर दिया गया.इससे साबित होता है कि तत्कालीन बिहार सरकार ओबीसी आरक्षण विरोधी है.बढ़े हुए आरक्षण दायरे को तो हाईकोर्ट के जरिए निरस्त कर दिया गया है.लेकिन पहले से तय ओबीसी कोटे को बिहार सरकार क्यों खत्म कर रही है.इसका जवाब बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार को देना चाहिए.
एक तरफ अमित शाह संविधान हत्या दिवस मनाने की सरकारी घोषणा कर रहें हैं.तो भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि ओबीसी आरक्षण खत्म करना संविधान की हत्या करने की बात है कि नहीं….?
बहाली के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को चरित्र प्रमाण पत्र की जरूरत है.चरित्र प्रमाण पत्र देने में पुलिस अधिकारियों के तरफ से मनमाना रवैया अख्तियार किया जाना भी दूर्भाग्यपूर्ण है.अग्निवीर योजना के खिलाफ आंदोलन में शिरकत करने वाले नौजवानों को चरित्र प्रमाण पत्र नहीं दिया जाना और दूसरे अभ्यर्थियों से भी पैसे लेने की बात बिहार सरकार की सुशासन की पोल खोल रही है.सरकार इस पर भी तत्काल संज्ञान ले.धरना आदि विरोध प्रदर्शनों के मुकदमे के वजह से चरित्र प्रमाण पत्र नहीं निर्गत करना नौजवानों के साथ सरकारी दमन है.


