जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार से शुभम चौहान कि रिपोर्ट सनातन संस्कृति को मजबूत किया भगवान श्रीकृष्ण ने
भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवनकाल सनातन धर्म को मजबूत करने में बीता है। उन्होंने अपने जीवन में एक आज्ञाकारी पुत्र, एक विश्वस्नीय पति, एक सच्चे मित्र और कुशल योद्धा के साथ – साथ महान प्रशासक के जीवन को सफलता पूर्वक चरितार्थ किया है। ये बातें विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष नितिन कुमार ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर नगर के प्रसिद्ध राधाकृष्ण मंदिर में कही।
उन्होंने कहा कि कुछ विधर्मियो और ईसाई मिशनरियों के द्वारा इतिहास को तोड़ मरोड़ पेश किया गया है। जिस में श्रीकृष्ण की 16000 रानियो के साथ विवाह और राधा जी के साथ प्रेम संबंध को गलत तरीके से पेश किया जाता है। जबकि वस्तुस्थिति ये है कि श्रीकृष्ण ने समाज से तिरस्कृत 16000 स्त्रियों को अपना नाम देकर समाज में सम्मान दिलाया था। उनका राधा जी के साथ विशुद्ध मित्रवत प्रेम था जिसे उन्होंने पूरे जीवन निभाया। इसी निश्छल प्रेम के कारण ही तो हम वर्तमान में कृष्ण के पहले राधा जी का नाम लेते हुए राधाकृष्ण कहते हैं। उन्होंने गाय, ग्वालों, गोपियों को गले लगाया वहीं द्वारकाधीश होते हुए भी अर्जुन के रथ के सारथी बने। उन्होंने समाज के सभी वर्गो को गले लगाया। उन्होंने अपने जीवन को जाति बंधन से मुक्त कर के सनातन धर्म को मजबूत करने का प्रयास किया है। जिसे कुछ ईसाई और बिकृत मानसिकता के लोग कमजोर करने में लगे हैं। ऐसे लोगो का प्रयास कभी सफल नहीं होने वाला है।
विहिप के नगर मंत्री मनीष गुप्ता ने कहा कि आज जो युवाओं में निराशावाद और लोगो में नकारात्मक विचारों के कारण आत्महत्या और गलत तरीके से धन कमाने की प्रृत्तियां बढ़ी है उसमें श्रीकृष्ण का जीवन संदेश अत्यंत प्रेरणादायक है। कान्हा जी का जन्म बंदीगृह में हुआ था और जन्म लेते ही अपने माता पिता से अलग होना पड़ा। बचपन से ही मामा कंस के द्वारा मारने का प्रयास किया गया। किशोरावस्था में कंस का बध किया। युवावस्था जरासंध से कई बार युद्ध किया और उसके कारण द्वारका नगरी बसाई। महाभारत काल में अर्जुन के सच्चे सारथी बन कर गीता का उपदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण का गीता उपदेश समस्त लोकों को ज्ञान से प्रकाशित किया है। जिसके कारण उन्हें जगतगुरू भी कहा जाता है। अंत में गांधारी के श्राप को हृदय से अपनाया। उनका चरित्र दुखो में भी संघर्ष करने वाला रहा है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में उतारना चाहिए।
राधाकृष्ण मंदिर के मुख्य पुरोहित और बाल संस्कार केन्द्र के प्रमुख प्रशन्नजीत झा ने बताया कि श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र में, बुधवार के दिन हुआ था। इस वर्ष संयोग से तीनों के साथ साथ जन्म काल में घनघोर वर्षा भी हुई है। जो कि संकेत है कि जल्द ही सनातन धर्म पर प्रहार करने वाले आधुनिक काल के विधर्मी कंसो का अंत होने वाला है। उनका अंत निकट आ चुका है।
जन्माष्टमी के शुभ अवसर मंदिर की साफ सफाई करके कार्यकर्ताओ ने भव्य साजो सज्जा किया। रात्रि के मध्यबेला में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य होने पर संपूर्ण मंदिर जय जयकार से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम में बजरंग दल के नगर संयोजक अभिमन्यु कुमार, कन्हैया साहू, प्रमोद बाजोरिया, घनश्याम सोनी,सोनू बाबू, रौशन झा, रुनीष जयनंद गुप्ता, शानिजयनंद गुप्ता सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सनातन संस्कृति को मजबूत किया भगवान श्रीकृष्ण
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