जगदूत न्यूज पटना बिहार से सनोबर खान कि रिपोर्ट दाखिल खारिज कैम्प के दौरान जो भी आवेदन आता है उसका कार्य कब तक और कहा तक होता है। आखिर लगान निर्धारण क्यों नही?
आम जनता की आवागमन की स्थिति बनी रहती है।
क्या बिहार सरकार के कर्मचारी आला अधिकारी बता सकते है कि दाखिल खारिज कैम्प के दौरान कितने लोगों का लगान निर्धारण से संबंधित फॉर्म आया और कितने लोगों का लगान निर्धारण किया गया। राज्य सरकार के द्वारा आम जनता को धोखा देने का कार्य क्यों किया जाता है। लगान निर्धारण के लिए सर्वे खतियान की मांग की जाती है। क्या सरकार बता सकती है कि 1930 यह 1932 के बाद कोई भी सर्व किया गया है क्या इस लिए आम जनता के द्वारा MSP खतियान निकलवाकर दिया जाता है इस बेसिस के आधार पर DCLR के द्वारा लगान निर्धारण नही किया जाता है।DCLR के द्वारा सर्वे खतियान की मांग की जाती है। जब लगभग 1908,1932,1930 के बाद कोई सर्वे हुआ ही नही है तो सर्वे की मांग क्यों? तो दाखिल खरिज कैम्प क्यों ? आम जनता के साथ देखावा क्यों? आम जनता को भ्रमित करने से सरकार को क्या फायदा सिर्फ कागजों पर दिखाने के लिए की आम जनता के लिए कैम्प लगवा कर कार्य करवाया जा रहा है।
पटना: दाखिल खारिज के लिए अंचलों में हर सोमबार को लगेगा शिविर : पटना जिले के सभी अंचलाें में हर सोमबार को कैंप लगाकर दाखिल खारिज के मामलों का निष्पादन किया जाएगा लेकिन ऐसा देखने को नही मिलता। यह निर्देश जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने आंतरिक संसाधन एवं राजस्व की बैठक के दाैरान दिया था। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को राजस्व वसूली में तेजी लाने का निर्देश दिया था । उन्हाेंने दाखिल खारिज के मामलों के निष्पादन के लिए विशेष अभियान चलाने और 21 दिन से अधिक और 63 दिन से अधिक के मामलों का एक सप्ताह के अंदर निष्पादन करने काे कहा गया था । लेकिन ये सब मामला कर्मचारी और अंचलाधिकारी पर आ कर अटक जाता है।
डीएम ने सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता को अपने क्षेत्रांतर्गत अंचल के दाखिल खारिज की समीक्षा करने और प्रगति लाने का निर्देश दिया था। सरकारी निर्देश के अनुरूप हल्का कर्मचारी के पास नहीं, बल्कि संबंधित अंचलाधिकारी के पास पंजी रहेगी। इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने काे कहा गया था। प्रत्येक शनिवार को थाने में अंचलाधिकारी अाैर थानाध्यक्ष को बैठक करने के साथ भूमि विवाद के मामले का निष्पादन करने का निर्देश दिया।लेकिन कभी कभी भूमि विवाद के मामले का निष्पादन थाने में देखने को मिलता है। ऐसा कब तक चलता रहे गा। आम जनता को भ्रामित कब तक किया जाए गा। ये है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्य सरकार उनकी मर्जी जो चाहे वो करवा सकते है। कर्मचारी से लेकर आलाअधिकारी तक कि रहती है मिली भगत। जाहिर सी बात है जब मिली भगत है तो भ्रष्ट तो बढे गा ही।


