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Wednesday, April 15, 2026

टीएमसी के गढ़ में सेंध: कम सीटों से प्रचंड चुनौती तक भाजपा का सफर

*2019 से 2024 तक चुनावी परचम: पश्चिम बंगाल में कैसे मजबूत होती गई भाजपा की पकड़ और बदलता गया सियासी गणित: चंदन चौरसिया*

*सीटों से आगे वोट प्रतिशत की रणनीति, बंगाल के विधानसभा सेगमेंट में गहराती पैठ का संकेत*

JNA/ कौशल कुमार पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी आंकड़े सिर्फ जीत-हार का संकेत नहीं होते, बल्कि वे उस व्यापक सामाजिक, राजनीतिक और संगठनात्मक बदलाव की कहानी कहते हैं, जो समय के साथ परिपक्व होता है। वर्ष 2019 से लेकर 2024 तक के चुनावी आंकड़ों को अगर पश्चिम बंगाल के 294 विधानसभा क्षेत्रों के संदर्भ में देखें, तो यह साफ तौर पर दिखाई देता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने न सिर्फ अपनी सीटों में इजाफा किया है, बल्कि अपने वोट प्रतिशत और प्रभाव क्षेत्र को भी लगातार विस्तार दिया है। यह दौर पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए एक ऐसी चुनावी निरंतरता का प्रतीक बन गया है, जिसमें हर चुनाव पिछले से ज्यादा मजबूत स्थिति का संकेत देता है। वरिष्ठ पत्रकार चंदन चौरसिया के अनुसार, “पश्चिम बंगाल में भाजपा की असली ताकत सिर्फ सीटों में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि वह वोट प्रतिशत में स्थायित्व और विस्तार है, जो उसे अन्य दलों, खासकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), से अलग करता है।  2019: पश्चिम बंगाल में मजबूत नींव का निर्माण , 2019 का लोकसभा चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस चुनाव में भाजपा ने न सिर्फ बहुमत के स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, बल्कि राज्य के कई इलाकों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी। अगर पश्चिम बंगाल के विधानसभा सेगमेंट के हिसाब से विश्लेषण करें तो भाजपा 56 विधानसभा सीटों पर पहले पायदान पर रही। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि पार्टी ने राज्य में जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी थी, लेकिन अभी विस्तार की संभावनाएं बाकी थीं। इस दौरान भाजपा को 50 प्रतिशत से अधिक वोट सिर्फ 61 सीटों पर ही मिले थे, जबकि कई सीटों पर उसे 40 से 50 प्रतिशत के बीच वोट मिले। यह स्थिति बताती है कि बंगाल में पार्टी की लोकप्रियता तो व्यापक थी, लेकिन उसे और मजबूती देने के लिए रणनीतिक विस्तार की जरूरत थी। 2021: बंगाल विधानसभा चुनाव और संगठन की परीक्षा : 2021 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस चुनाव में पार्टी ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की और कुल 201 सीटों पर दूसरे पायदान पर रही। यानी लगभग हर क्षेत्र में उसकी उपस्थिति मजबूत बनी रही, खासकर टीएमसी के पारंपरिक गढ़ों में। चंदन चौरसिया के अनुसार, “पश्चिम बंगाल में 2021 का चुनाव भाजपा के संगठनात्मक ढांचे की मजबूती का प्रमाण था। यह वह समय था जब पार्टी ने बूथ स्तर तक अपनी रणनीति को लागू किया और उसका सीधा असर नतीजों में दिखा।  इस चुनाव में भाजपा को 74 सीटों पर आरामदायक जीत मिली, जबकि सिर्फ एक सीट पर कांग्रेस और एक पर अन्य दलों ने उसे कड़ी टक्कर दी। यह आंकड़ा यह बताता है कि पार्टी ने न सिर्फ जीत हासिल की, बल्कि अपने विरोधियों—खासकर टीएमसी—को कई क्षेत्रों में निर्णायक चुनौती दी। मत प्रतिशत के लिहाज से भी यह चुनाव बेहद अहम रहा। भाजपा को 50 प्रतिशत से अधिक वोट 45 से 50 सीटों के बीच मिले, जबकि 64 सीटों पर उसे 45 प्रतिशत से अधिक वोट मिले। यह संकेत था कि पश्चिम बंगाल में पार्टी का कोर वोट बैंक मजबूत हो चुका है और वह नए वोटर्स को भी लगातार जोड़ रही है। वोट प्रतिशत का बढ़ता ग्राफ: बंगाल में असली ताकत: पश्चिम बंगाल की राजनीति में अक्सर सीटों की चर्चा ज्यादा होती है, लेकिन असली ताकत वोट प्रतिशत में छिपी होती है। 2019 से 2024 के बीच भाजपा ने इस मोर्चे पर उल्लेखनीय प्रगति की है। 2019 में जहां पार्टी को सीमित सीटों पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे, वहीं 2024 तक आते-आते यह संख्या बढ़कर 90 सीटों तक पहुंच गई। इसका मतलब यह है कि पार्टी ने बंगाल के उन क्षेत्रों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली, जहां पहले वह सिर्फ प्रतिस्पर्धा में थी।चंदन चौरसिया कहते हैं, “पश्चिम बंगाल में वोट प्रतिशत का यह विस्तार बताता है कि भाजपा अब सिर्फ एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि एक स्थायी राजनीतिक विकल्प बन चुकी है, जो टीएमसी को सीधी चुनौती दे रही है। 2024: पश्चिम बंगाल में प्रभाव का चरम विस्तार 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के विधानसभा सेगमेंट का विश्लेषण भाजपा के लिए एक और बड़ी उपलब्धि को दर्शाता है। इस चुनाव में पार्टी ने कुल 146 विधानसभा सीटों पर 40 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए। वहीं 90 सीटों पर वह पहले स्थान पर रही, जबकि 177 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। यह आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि पश्चिम बंगाल में भाजपा अब सिर्फ जीतने वाली पार्टी नहीं रही, बल्कि वह हर क्षेत्र में टीएमसी को मजबूत चुनौती देने वाली शक्ति बन चुकी है। सबसे अहम बात यह है कि 36 सीटों पर पार्टी को 50 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जबकि 84 सीटों पर उसे 45 प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त हुए। यह स्थिति बताती है कि बंगाल में पार्टी का कोर वोट बैंक न सिर्फ स्थिर है, बल्कि लगातार बढ़ रहा है। सीटों का गणित और बंगाल में रणनीतिक बढ़त: अगर हम 2019, 2021 और 2024 के आंकड़ों की तुलना पश्चिम बंगाल के संदर्भ में करें तो एक स्पष्ट ट्रेंड सामने आता है—भाजपा ने हर चुनाव में अपनी स्थिति को बेहतर किया है। 2019: 56 सीटों पर बढ़त (विधानसभा सेगमेंट) 2021: 77 सीटों पर जीत (विधानसभा चुनाव) 2024: 90 सीटों पर बढ़त (लोकसभा आधारित विधानसभा सेगमेंट) यह वृद्धि सिर्फ संख्यात्मक नहीं है, बल्कि यह उस रणनीतिक बदलाव का परिणाम है, जिसमें पार्टी ने पश्चिम बंगाल में हर चुनाव को एक नए अवसर के रूप में लिया। चंदन चौरसिया के मुताबिक, “भाजपा की रणनीति का सबसे बड़ा पहलू यह है कि वह पश्चिम बंगाल में हर चुनाव से सीखती है और अगले चुनाव में उसे लागू करती है।  संगठन और नेतृत्व की भूमिका (बंगाल संदर्भ) : पश्चिम बंगाल में भाजपा की इस बढ़ती ताकत के पीछे सिर्फ चुनावी रणनीति ही नहीं, बल्कि उसका तेजी से मजबूत होता संगठन भी है। पार्टी ने बूथ स्तर तक अपनी पकड़ बनाई है और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखा है, जिससे टीएमसी के लंबे समय से स्थापित नेटवर्क को चुनौती मिली है। विपक्ष की स्थिति: टीएमसी बनाम भाजपा: पश्चिम बंगाल में भाजपा की मजबूती के साथ-साथ विपक्ष की संरचना भी एक अहम फैक्टर रही है। यहां मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा के बीच सिमटता गया है, जबकि कांग्रेस और वाम दलों का प्रभाव सीमित होता गया। चंदन चौरसिया कहते हैं, “पश्चिम बंगाल की राजनीति अब द्विध्रुवीय हो चुकी है—टीएमसी बनाम भाजपा। और यही भाजपा के विस्तार का सबसे बड़ा अवसर भी है। सामाजिक समीकरण और बंगाल में विस्तार : भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सिर्फ पारंपरिक वोट बैंक पर निर्भर रहने के बजाय नए सामाजिक समूहों को भी अपने साथ जोड़ा है। सीमावर्ती क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों और युवा मतदाताओं के बीच उसकी पकड़ मजबूत हुई है। निष्कर्ष: बंगाल में लंबी राजनीतिक लड़ाई की तैयारी: 2019 से 2024 तक का चुनावी सफर पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए एक निरंतर प्रगति की कहानी है। यह कहानी सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि वोट प्रतिशत, संगठनात्मक मजबूती और रणनीतिक विस्तार की भी है। वरिष्ठ पत्रकार चंदन चौरसिया की इस विश्लेषण रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुविचारित रणनीति और निरंतर मेहनत का परिणाम है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि टीएमसी के मजबूत गढ़ में यह चुनौती किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Prabhu Jee
Prabhu Jeehttp://www.jagdoot.in
ब्यूरो चीफ, खगड़िया (जगदूत न्यूज)
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