*इनको ना कोई बोलने वाला ना कोई देखने वाला करते है अपना मनमाना कार्य*
जगदूत न्यूज पटना बिहार से सनोबर खान कि रिपोर्ट
पटना जिले के पटना सदर अंतर्गत राजस्व कर्मचारी कार्यालय पटना का मामला है जहाँ पटना से लेकर पटना सिटी तक के हल्का कर्मचारी करते है अपनी मनमानी। सरकारी नियम कायदे पर जिले के हलका कर्मचारी भारी पड़ रहे हैं. जमीन से संबंधित सारी जानकारी इनके पास है. फिलहाल पटना जिले के अंचलों में आवश्यकतानुसार हलका कर्मचारी नहीं हैं. परिणाम है कि एक के जिम्मे तीन से चार हल्का का जिम्मेवारी सौंप दी जाती है। इस लिए करते है अपनी मनमानी। हल्का कर्मचारी
का रौब रहता है सांतबे आसमान पर फिर भी अलाधिकारी द्वारा उन पर कोई करवाई नही किया जाता। राजस्व कर्मचारी अरविंद कुमार, शशि शंकर, पशुराम सिंह कर्मचारी करते है अपनी मनमानी।कर्मचारी को लेकर सारे कर्मचारी को बदनामी उठाना पर रहा है। सूत्रों के अनुसार बिना पैसा लिए कोई कार्य आगे नही करते है। कर्मचारी कभी कार्यालय आते है कभी नही आते है।सूत्रों के अनुसार सारे कर्मचारी अपने अपने दलाल रख कर कार्य करवाते है और पैसे की सेटिंग वेटिंग करते है। जनता कर्मचारी के इन्तेजार में इन्तेजार कर के मायूस होकर घर चले जाते है। ऐसे में कर्मचारियों के रूतबे का क्या कहना! नेता हों या फिर कोई अन्य हर कोई कर्मचारियों से संबंध बेहतर चाहता है.
सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों के बैठने के लिये कोई जगह निश्चित नहीं है। ऐसे में अपनी पसंद के स्थान पर उनका अपना कार्यालय चल रहा था। लेकिन जिलाधिकारी के आदेश से प्राइवेट कार्यालय को हटा दिया गया। अपना अलग दफ्तर. अपनी मनमर्जी का दफ्तर. अपना आदमी साथ रखते थे। जो काम के बदले रकम वसूली का काम करते थे। हर काम के लिये अलग-अलग फीस से इनकी दिनचर्या आरंभ होती थी। सूत्रों के अनुसार हल्का कर्मचारी-अपने क्षेत्रों में अपने स्तर से दिहाड़ी पर क्लर्क की बहाली कर रखी है. इन्हीं ‘अवैध क्लर्क’ के हवाले से जमीन की दाखिल-खारिज से लेकर अन्य महत्वपूर्ण कार्य चलाए जा रहे हैं.
कर्मचारियों की है जिम्मेवारीः
जमीन की जमाबंदी, भू-लगान की रसीद कटाई, दाखिल खारिज के लिये प्राप्त आवेदनों की जांच कर प्रस्ताव तैयार करना सहित अन्य कार्य के निष्पादन में ‘हेरफेर की गुंजाइश’ को लोग बखूबी जानते हैं. राजस्व कर्मचारी द्वारा प्रस्ताव तैयार करने के बाद उसे सर्किल इंस्पेक्टर के पास भेजा जाता है.
इसके बाद सीओ उसका निष्पादन करते हैं. जमीन की रसीद काटने के बाद उसे सरकारी खजाने में जमा करने की जिम्मेवारी भी उनकी है. उससे कम से कम पांच गुनी ज्यादा राशि की मांग हल्का कर्मचारी करते हैं. दाखिल-खारिज के मामले में यह राशि और अधिक हो जाती है. यहां बिना चढ़ावा के कोई काम संभव नहीं है.चलती है मनमानी :
जिले में राजस्व कर्मचारियों की कमी के कारण इनकी मनमानी चलती है. वे कई हल्का के प्रभार में रहते हैं. वैसे समाहर्ता को संविदा पर राजस्व कर्मचारी बहाल करने का अधिकार है बहरहाल सरकारी नियम-कायदे इनके लिये कोई मायने नहीं रखता। और ना किसी अला अधिकारी के द्वारा कोई करवाई किया जाता है। ऐसा प्रत्रित होता है कर्मचारी से लेकर अंचलाधिकारी की मिली भगत होती है।


