जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद
कहो वो कौन सी चोटी जहां पहुंची न हो बेटी,
समाज के ठेकेदारों ने रोका बहुत है। रास्ता,
कभी सेफ्टी तो कभी इज्जत का देकर वास्ता,
मगर वो भूल जाते हैं ।मैं दुर्गा भी मैं काली भी,
चला सकती हूं ,देश को चलाती घर की भी रोटी,
कहो वो कौन सी चोटी जहां पहुंची न हो बेटी।
न मारो पेट में मुझको मुझे आगाज करने दो,
मौका तो दो कि कुछ करूं तुम्हें नाज करने को,
बेटों से बेहतर हूं, मगर समता तो दो मुझको,
वरदान हूं, शिव का मगर ममता तो दो मुझको,
वो मेरी कोख है । जहां पल रही जीवन सृजन ज्योति,
कहो वो कौन सी चोटी जहां पहुंची न हो बेटी।
(मनीष सौरभ)
कवि भारतीय रेलवे यातायात सेवा के अधिकारी हैं और आईआईटी बॉम्बे के छात्र रहे हैं।


