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Thursday, April 16, 2026

मानस इंटरनेशनल की बेटी बनी विश्व विजेता

जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद

*हम प्रतिभावान चुनते नहीं, बनाते हैं, डॉ. अरुण*

*सपनों को हकीकत में बदलना हमारी परंपरा है, निशांत रंजन*

मानस इंटरनेशनल फाउंडेशन के द्वारा संचालित मानस इंटरनेशनल स्कूल जहानाबाद की कक्षा छह की छात्रा पलक सिन्हा ने इंटरनेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन (International Talent Search Examination) में पूरे विश्व में पहला स्थान प्राप्त कर जिले, बिहार और पूरे भारत का नाम गौरव से ऊँचा कर दिया। खास बात यह है कि पलक ने गणित विषय में 180 में 180 अंक प्राप्त कर यह अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक सफलता पर विद्यालय प्रांगण में भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में पलक सिन्हा को ₹50,000 का चेक और एक अत्याधुनिक लैपटॉप भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके अलावा, इस परीक्षा में चयनित विद्यालय के अन्य 105 बच्चों को डिजिटल वॉच, डिजिटल कैलकुलेटर, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल देकर प्रोत्साहित किया गया। इस समारोह में मानस इंटरनेशनल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. अरुण कुमार सिन्हा, निदेशक निशांत रंजन, पलक के दादाजी रमाकांत प्रसाद, इंटरनेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन के बिहार-झारखंड प्रभारी ऋषभ शर्मा, शिक्षकगण, अभिभावक और विद्यार्थी मौजूद रहे। पूरे विद्यालय में उत्साह और गर्व का ऐसा वातावरण था, मानो किसी बड़े महोत्सव का आयोजन हो रहा हो। हर बच्चे के चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक थी और सभी के मन में यही भावना थी कि अगर पलक कर सकती है, तो हम भी कर सकते हैं। पलक की इस ऐतिहासिक सफलता ने पूरे विद्यालय परिवार को नई ऊर्जा और उम्मीद से भर दिया। चेयरमैन डॉ. अरुण कुमार सिन्हा ने अपने विस्तृत और भावनात्मक संबोधन में कहा कि आज का यह ऐतिहासिक दिन न केवल विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे जहानाबाद और बिहार के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है। पलक सिन्हा ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा और परिश्रम का परचम लहरा सकती हैं। उन्होंने कहा कि पलक की सफलता हम सभी के लिए अमूल्य प्रेरणा है और इसने यह सिखाया कि जब दृष्टि में दूरदर्शिता हो, नेतृत्व में सच्चाई और प्रेरणा हो तथा बच्चों को सही माहौल, संसाधन और समर्थन मिले, तब कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता। उन्होंने आगे कहा कि हमारा विद्यालय केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नैतिक मूल्यों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की तैयारी पर केंद्रित रहता है। पलक की उपलब्धि इसी दृष्टिकोण की सच्ची जीत है। उन्होंने पलक के माता-पिता और दादाजी रमाकांत प्रसाद का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने हर परिस्थिति में पलक का हौसला बनाए रखा और उसके सपनों को पंख देने का कार्य किया। पलक की इस सफलता ने विद्यालय के सभी बच्चों में आत्मविश्वास और जज्बा भर दिया है। आज हर बच्चा कह रहा है कि अगर पलक कर सकती है, तो हम भी कर सकते हैं। यही आत्मविश्वास किसी भी समाज और राष्ट्र के लिए सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. सिन्हा ने विद्यालय के सभी शिक्षकों का भी अभिनंदन किया और कहा कि यह उनके परिश्रम, समर्पण और मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि पलक आज इस मुकाम पर पहुँची है। अंत में उन्होंने पलक को फिर से दिल से बधाई दी और ईश्वर से प्रार्थना की कि वह भविष्य में भी इसी प्रकार सफलता की नई ऊँचाइयाँ छूती रहे। निदेशक निशांत रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन विद्यालय के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया है। पलक सिन्हा ने जो कर दिखाया है, वह अद्वितीय और अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि पलक ने यह साबित कर दिया है कि अगर दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और सच्ची लगन हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। पलक बचपन से ही जिज्ञासु और सीखने के प्रति उत्सुक रही हैं। चाहे वह कक्षा में हो या किसी प्रतियोगिता में, पलक ने हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। उनकी सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और कभी न हार मानने वाला जज्बा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि विद्यालय का यह विश्वास रहा है कि हर बच्चा विशेष होता है और हर बच्चे में कोई अनोखी प्रतिभा छिपी होती है, जिसे पहचानकर उसे सहेजना ही हमारा कर्तव्य है। पलक की सफलता ने इस सोच को और अधिक मजबूत कर दिया है। निशांत रंजन ने पलक के परिवार का विशेष धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने हर मोड़ पर विद्यालय का साथ दिया और पलक को हर परिस्थिति में प्रोत्साहित किया। उन्होंने सभी शिक्षकों के समर्पण और कड़ी मेहनत की भी सराहना की, जिन्होंने पलक को तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि आज पलक ने पूरे विद्यालय के बच्चों के लिए एक नई राह बना दी है। अब कोई भी यह नहीं कह सकता कि बड़े मंचों पर सिर्फ बड़े शहरों के बच्चे ही सफल हो सकते हैं। पलक ने यह साबित कर दिया है कि अगर संकल्प सच्चा हो, तो कोई भी सपना नामुमकिन नहीं। अंत में उन्होंने कहा कि पलक की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करती रहेगी और हमें गर्व है कि हम सभी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। उन्होंने पलक को ढेरों शुभकामनाएँ और आशीर्वाद देते हुए कहा कि विद्यालय का हर शिक्षक और विद्यार्थी उनकी इस यात्रा में हमेशा उनके साथ है।पलक के दादाजी रमाकांत प्रसाद ने कहा कि पलक ने बचपन से ही पढ़ाई में कड़ी मेहनत और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उसकी यह उपलब्धि पूरे परिवार और समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है। हमें गर्व है कि उसने जहानाबाद का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया।पलक सिन्हा ने भी मंच से अपने शिक्षकों, परिवार और मित्रों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता सबके आशीर्वाद और सहयोग का परिणाम है। सम्मान समारोह में पुष्प वर्षा, तालियों की गड़गड़ाहट और बच्चों के जोशीले नारों ने वातावरण को उत्सव में बदल दिया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगण मनीष कुमार, संजीव कुमार, प्रियंका कुमारी, प्रशांत कुमार, राधेश्याम कुमार एवं जितेंद्र कुमार भी उपस्थित रहे और उन्होंने भी इस गौरवशाली क्षण में पलक को शुभकामनाएँ दीं।

Prabhu Jee
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ब्यूरो चीफ, खगड़िया (जगदूत न्यूज)
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