जगदूत न्यूज अनिल कुमार गुप्ता ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद स्थानीय आर्य समाज मंदिर जहानाबाद के प्रांगण में मर्यादा पुरुषोत्तम आर्यपुत्र श्री राम चंद्र जी महाराज के जन्मोत्सव अर्थात रामनवमी के शुभ अवसर पर पंच कुण्डीय वैदिक महायज्ञ सह राष्ट्र रक्षा आध्यात्मिक समागम का आयोजन किया गया । जिसमें यज्ञ के ब्राह्म आर्य जगत के मूर्द्धन्य वैदिक विद्वान आचार्य संजय सत्यार्थी जी के आचार्यत्व में कार्यक्रम का प्रारंभ प्रातः यज्ञ के साथ किया गया । साथ मुख्य अतिथि बिहार राज्य प्रतिनिधि सभा पटना के उप प्रधान सर्वश्री डॉ बच्चू लाल आर्य पधारे। जिसमें सैकड़ों लोग ने यज्ञ में वेद मंत्रों से आहुति प्रदान कर समाज और राष्ट्र के उन्नति और विश्व में शांति की कामना की। तत्पश्चात मर्यादा पुरुषोत्तम आर्य श्री रामचंद्र जी महाराज के जीवन के आदर्शों के विषय में आचार्य संजय सत्यार्थी जी ने अपने व्याख्यान में बताया कि यदि किसी मनुष्य को धर्म का साक्षात् स्वरुप देखना हो तो उसे वाल्मीकि रामायण का अध्ययन करना चाहिये। श्री राम जी का चरित्र वस्तुतः आदर्श धर्मात्मा का जीवन चरित्र है। महर्षि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना करके वस्तुतः श्री रामचन्द्र जी के काल में प्रचलित धर्म व संस्कृति को ही प्रचारित व प्रसारित किया है। भारत का बच्चा-बच्चा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी के जीवन चरित्र से प्रेरित हो और अपने जीवन और व्यवहार में उनको अपना आदर्श मानकर उनका अनुकरण करे। आज के समय में युवा पीढ़ी कुसंगती में पड़ कर दुर्व्यसन और अनेकों बुराइयों के शिकार हो रहे हैं इससे बचने हेतु समाज के प्रत्येक व्यक्ति को यह जिम्मेदारी है कि वो बच्चों को संस्कार संस्कृति से परिचित करते हुए अपने राष्ट्र और समाज सेवा के लिए प्रेरित कर श्री राम जी जैसा आदर्शवान बने। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी के जीवन के आदर्शों को अपना कर हम अपने घर से शुरू करते हुए पूरे देश में राम राज्य स्थापित कर सकते हैं अपने बच्चों को राम जी के आदर्श पर चलने की शिक्षा दें। इसी संकल्प के साथ इस रामनवमी को सब लोग मनाए कि हम राम जी के आदर्शों को अपने जीवन में धारण करेंगे ।वाल्मीकि रामायण में श्री राम के गुणों का वर्णन कैकेयी इस प्रकार करती है-‘‘राम धर्मज्ञ, गुणवान्, जितेन्द्रिय, सत्यवादी और पवित्र हैं तथा बड़े पुत्र होने के कारण वे ही राज्य के अधिकारी हैं। राम अपने भाईयों और सेवकों का अपनी सन्तान की तरह पालन करते हैं।” महर्षि वशिष्ठ कहते हैं की राज्याभिषेक के लिए बुलाए गए और वन के लिए विदा किए गए श्री राम के मुख के आकार में मैंने कोई भी अन्तर नहीं देखा। राज्याभिषेक के अवसर पर उनके मुख मण्डल पर कोई प्रसन्नता नहीं थी और वनवास के दुःखों से उनके चेहरे पर शोक की रेखाएं नहीं थी। इस कार्यक्रम में मुख्य सपत्नीक यजमान श्री अनिल आर्य, श्री राकेश कुमार, श्री संजय गुप्ता, श्री सुजीत आर्य, डॉ संतोष कुमार, श्री पप्पू आर्य, श्रीमती पूनम जी, शिशुपाल आर्य, इत्यादि सैकड़ो भक्तों ने अपनी पुण्य आहुति प्रदान की। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी के जय घोष एवं जय श्री राम के नारे के साथ हुआ । कार्यक्रम के मुख्य आयोजक आर्य समाज जहानाबाद के प्रधान श्री अजय आर्य, मंत्री श्री विनोद कुमार चंचल एवं प्रकाश चंद्र आर्य, श्री महेंद्र आर्य रहे एवं विशेष सहयोग श्री सुजीत आर्य, श्री संजय आर्य, श्री अनिल आर्य, श्रीमति पूनम गुप्ता,श्री आशुतोष जी, श्रीमती सरिता देवी, श्री राकेश जी, श्री रंजीत जी, श्री सत्यप्रकाश आर्य, श्री नरेश जी, सुश्री अमृता आर्या, सुश्री मोनी आर्यनी, सुश्री चांदनी आर्यनी का प्राप्त हुआ ।


