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Thursday, April 16, 2026

राष्ट्रीय पचपौनीया विकास संघ ने मनाया संत रविदास की जयंती

जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार से पी के ठाकुर कि रिपोर्ट खगड़िया राष्ट्रीय पचपौनीया विकास संघ की और से केंद्रीय कार्यालय, चम्पा नगर सोनमंकी रोड में संत सिरोमणी रविदास की जयंती समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम में संत रविदास जी के तैलीय चित्र पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्जुन कुमार शर्मा, राष्ट्रीय सचिव रंजन ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष उमेश ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखरम, रेल उपभोक्ता संघर्ष समिति संयोजक सुभाष चंद्र जोशी, राष्ट्रीय सदस्य सह प्रांतीय मीडिया प्रभारी पाण्डव कुमार, जिला अध्यक्ष गुड्डू ठाकुर, भारतीय नाई समाज संरक्षक कालेश्वर ठाकुर, जिला अध्यक्ष श्रवण ठाकुर, कोषाध्यक्ष शम्भू कुमार,युवा जिलाध्यक्ष राकेश कुमार, भाजपा खगड़िया के लोकसभा विस्तारक मुरारी पासवान, किशोर यादव, रुवीर कुमार, जवाहर पासवान, मोनू कुमार आदि दर्जनों कार्यकर्ताओ द्वारा संयुक्त रूप से पुष्पमाला व पुष्प अर्पित कर किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्जुन शर्मा,संचालन जिला अध्यक्ष गुड्डू ठाकुर व धन्यवाद ज्ञापन प्रांतीय मीडिया प्रभारी पाण्डव कुमार ने किया।मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्जुन शर्मा ने कहा संत रविदास जी का जन्म माघ पूर्णिमा के दिन वाराणसी के पास हुई थी। वे वेहद धार्मिक स्वभाव के थे। वे भक्तिकालीन संत और महान समाज सुधारक थे। उन्होंने भगवान की भक्ति, अपना कर्म के साथ साथ वे सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यो का भी पालन किये थे। संत रविदास जी ने लोगो को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा दिये थे। वे भक्ति के मार्ग पर चलकर संत सिरोमणी रविदास कहलाए । संत का अर्थ है आत्म ज्ञान। आज हमे उनके मार्ग को अपनाने की आवश्यकता है ।प्रदेश अध्यक्ष उमेश ठाकुर ने कहा संत रविदास जी ने अपनी आजीविका के लिए पैतृक कार्य करते थे। लेकिन इनके मन में भगवान की भक्ति पूर्व जन्म के पुण्य से ऐसी रची बसी थी कि, आजीविका को धन कमाने का साधन बनाने की बजाय संत सेवा का माध्यम बना लिया। उन्होंने कहा रविदास जी के बारे में कहा जाता है कि बचपन से ही उनके पास अलौकिक शक्तियां थीं। बचपन में अपने दोस्त को जीवन देने, पानी पर पत्थर तैराने, कुष्ठ रोगियों को ठीक करने समेत उनके चमत्कार के कई किस्से प्रचलित हैं। वे जातिवाद के शिकार भी हुए थे। फिर भी उन्होंने न भक्ति छोड़ी न अपना कर्म । इसलिए वे संत सिरोमणी रविदास कहलाए ।वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखरम् ने कहा जो समाज के लिए त्याग करते है, कठिनाईयों को पार करते हुए समाज के लिए कुछ करते है वही संत कहलाते है । संत रविदास जी भक्ति व कर्म से संत बने वर्तमान समय में उनके मार्ग को अपनाकर समाज विकास का करने की आवश्यकता है । समाज में सभी जाति को जोड़ने की आवश्यकता है ।सुभाष चंद्र जोशी ने कहा जो समाज के लिए जातिवाद से हटकर,निःस्वार्थ भाव से सामाजिक कार्य करते है, मानव विकास के लिए कार्य करते हुए भक्ति करते हे वही संत कहलाते है । वैसे ही पूजनीय थे संत रविदास जी उनके विचार को अपनाकर ही मानव संत बन सकते है ।गुड्डू ठाकुर, श्रवण ठाकुर, कालेश्वर ठाकुर ने कहा संत रविदास जी अपना अधिकांश समय भगवान की पूजा में लगाते थे और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए, उन्होंने एक संत का दर्जा प्राप्त किया। ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ रविदास जी का ये दोहा आज भी प्रसिद्ध है। रविदास जी का कहना था कि शुद्ध मन और निष्ठा के साथ किए काम का हमेशा अच्छा ही परिणाम मिलता है।

Prabhu Jee
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ब्यूरो चीफ, खगड़िया (जगदूत न्यूज)
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