जगदूत न्यूज खगड़िया बिहार ब्यूरो चिप प्रभु जी खगड़िया, 10 अप्रैल सदर प्रखंड के बेला में आयोजित वीर शिरोमणि बाबा चौहरमल मेला के तहत बुधवार की रात भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि दलित युवा संग्राम मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष आचार्य राकेश पासवान शास्त्री एवं समाज सेविका शीलकमल पासवान ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। उद्घाटन के अवसर पर अपने संबोधन में आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने मेला आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा चौहरमल सामाजिक एकता, अखंडता और वीरता के प्रतीक थे।
उन्होंने अन्याय, अत्याचार और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ जीवनभर संघर्ष कर समाज को नई दिशा दी, जिनकी गाथा आज भी प्रेरणादायक है। उन्होंने विशेष रूप से समाज में बढ़ रही विकृतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों के बीच फैल रहे “सुखा नशा” को जड़ से समाप्त करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने आह्वान किया कि बाबा चौहरमल के आदर्शों पर चलकर समाज को तलवार नहीं, बल्कि शिक्षा और कलम के जरिए मजबूत बनाना होगा। नशामुक्त, शिक्षित और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। उन्होंने गायक और गायिका कलाकारों का स्वागत सम्मान एवं अभिनंदन करते हुए शांति -सौहार्द और भाईचारे की वातावरण में मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील किया।वहीं शीलकमल पासवान ने कहा कि बाबा चौहरमल हमारे कुलदेवता हैं और उनके जन्मोत्सव पर आयोजित यह सात दिवसीय मेला पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने भविष्य में स्थानीय कलाकारों को और अधिक मंच देने की बात कही। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथियों ने कलाकारों को आर्थिक रूप से सम्मानित भी किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकार गुंजन राज बिहारी और सोनियां संगम की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया, वहीं उद्घोषक राहुल झा ने अपने शायराना अंदाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष रविंद्र पासवान, सेवा निवृत प्रधानाध्यापक सुभाष पासवान, लोजपा रामविलास पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रूपक पासवान,सचिव अमरनाथ पासवान, कोषाध्यक्ष अमृत पासवान सहित दीपक, अभिषेक, अविनाश, नीतीश, सिंटू, मनोहर, शिवधर, आजाद, गुड्डू पासवान, विशाल, शनातन, अंकित, उदय, मिथुन, कुलदीप, आदित्य, पियुष, ज्ञानी पासवान एवं राजा पासवान समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
बेला चौहरमल मेला में सांस्कृतिक संध्या की धूम, “सुखा नशा” के खिलाफ जागरूकता की जरूरत– राकेश पासवान शास्त्री
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