क्रांति दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति के नाम 10 सूत्री मांगों का स्मार पत्र संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने जुलूस निकालकर . सौपा
जगदूत न्यूज (अनिल कुमार गुप्ता )ब्यूरो प्रमुख जहानाबाद
संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत ऐतिहासिक स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरणा स्रोत 9 अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर जहानाबाद में अंबेडकर चौक से समाहरणालय तक दंगाई व कारपोरेट लुटेरों की मोदी सरकार गद्दी छोड़ो नारों के साथ जुलूस निकाला जिसका नेतृत्व *किसान महासभा के नेता घोसी विधायक रामबली सिंह यादव, जिला अध्यक्ष जिला सचिव शौकीन यादव, बिहार राज्य किसान सभा के नेता जगदीश प्रसाद, सचिव ओम प्रकाश सिंह, अध्यक्ष दिलीप कुमार, भारतीय किसान मजदूर संगठन के नेता जर्मन सिंह, किसान महासभा के नेता ब्रह्मदेव प्रसाद, चितरंजन पासवान, मिथिलेश कुमार, माले नेता श्रीनिवास शर्मा, सीपीएम नेता दिनेश प्रसाद, रामप्रसाद पासवान आदि ने किया।* राष्ट्रपति के नाम 10 सूत्री मांगों का एक स्मार- पत्र जिलाधिकारी को सौपा जिसमें एमएसपी को कानूनी दर्जा देने, किसानों के लिए लाभकारी दर की गारंटी करने, बिजली संशोधन बिल 2022 वापस लेने, प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 300 यूनिट मुक्त बिजली देने, पानी पंपों के लिए मुफ्त बिजली प्रदान करने और कोई प्रीपेड मीटर न लगने, लखीमपुर खीरी में पत्रकार और किसानों के नरसंहार के मुख्य साजिशकर्ता केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने एवं उनके खिलाफ मुकदमा चलाने, लखीमपुर खीरी के जेल में बंद किसानों पर से फर्जी मुकदमा वापस लेते हुए अविलंब रिहाई करने, ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए सभी किसान परिवारों को मुआवजा एवं पुनर्वास की व्यवस्था करने, शहीद सभी किसानों के लिए सिंघु बॉर्डर पर भूमि आवंटित करने तथा स्मारक निर्माण करने, कारपोरेट समर्थक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खारिज करने, जलवायु परिवर्तन, बाढ़, सूखा, फसल संबंधी बीमारियों के कारण किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सभी फसलों के लिए व्यापक फसल बीमा योजना लागू करने, सभी मध्यम ,लघु एवं सीमांत किसानों और कृषि मजदूरों के लिए प्रतिमाह ₹10000 के किसान पेंशन लागू करने आदि प्रमुख मांगे थी।
इस अवसर पर कारगिल चौक पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि कारपोरेट परस्त नीतियों के कारण खेती-किसानी बर्बादी का धंधा हो गया है ।किसानों का जीवन-जीविका मोदी राज में चौपट हो गया। 2022 तक सभी किसानों की आमदनी दुगुना करने की वादा तार-तार हो गया है। अडानियों और अंबानियों को दुनिया में सबसे ज्यादा अमीर बनाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार सभी राष्ट्रीय संसाधनों जल,जंगल, नदी पहाड़ ,तमाम सरकारी कंपनियां को अंधाधुंध नीलामी कर रही है। किसानों और मजदूरों को कारपोरेट कंपनियों का गुलाम बनाने पर तुली हुई है।
मोदी राज में नए रूप रंग के साथ और भी क्रूर जमीनदारी आ रही है।
अब डुमरांव, बेतिया,दरभंगा के महाराजाओं से बहुत बड़े-बड़े और ज्यादा क्रूरता से खून चूसने वाले देसी ,विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियां देश की आजादी और संविधान के लिए खतरा बन गई है। कॉरपोरेटियों द्वारा संघ गिरोह और दंगाइयों को बड़ी मात्रा में धनराशि उपलब्ध करा के देश में अशांति पैदा करने की एक सुनियोजित परियोजना मोदी एवं संघी गिरोहों के देखरेख व दिशा निर्देशन में चलाई जा रही है। यह एक बड़ी चुनौती है।
डब्ल्यू टी ओ और आसियान के इशारे पर कृषि और किसानों को तबाह कर दिया गया है। मोदी सरकार जीएम सरसों जिसे किसान निर्वंश बीज की
संज्ञा दे रहे हैं कि खेती कर किसानी और पर्यावरण को तबाह करने को हरी झंडी दिखा चुकी है। बीज, उर्वरक, कीटनाशक , सिंचाई, पानी समेत सभी इनपुट सब्सिडी को खत्म करके किसानों को खेती छोड़ने के लिए मजबूर करने वाली मोदी सरकार के खिलाफ किसान संघर्ष के लिए कमर कस चुके हैं। मोदी सरकार 9 सालों से खेती, रोजगार, लघु उद्योगों ,नौकरी, आदि को समाप्त कर दंगा फसाद की खेती कर रही है।
मणिपुर में आदिवासी महिलाओं को आरएसएस प्रायोजित भीड़ ने सरेआम नंगा परेड कराकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को धूमिल किया है। इस तरह से नूंह से लेकर गुरुग्राम तक सरकार प्रायोजित दंगा और दंगा में एक खास समुदाय को चिन्हित कर उनके घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नष्ट करने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई करने तथा आरपीएफ पुलिस द्वारा दलित पदाधिकारी से लेकर ट्रेन में अल्पसंख्यक समुदाय को पहचान करके हत्या करने की संघ प्रायोजित घटना ने 2024 के चुनाव के पहले देशव्यापी अशांति का स्पष्ट संकेत दे दिया है।
देश की आजादी के दौरान संघ गिरोह का अंग्रेजों की दलाली और मुखबिरी का इतिहास भरा पड़ा है। आज दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता संग्राम से गद्दारी करने वालों के राजनीतिक वारिस सर्वोच्च सत्ता पर पहुंचकर अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने साष्टांग दंडवत कर रहा है। देश को बचाने के लिए सबको एकजुट होना आज यही समय की सबसे महत्वपूर्ण मांग है।


